इंडिया गठबंधन की हरकतों के कारण भाजपा को नए सिरे से रिवाइवल का मौका मिल रहा है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर गोलमोल बात करना और पश्चिम बंगाल की घटनाओं पर खामोशी इंडिया गठबंधन के घटक दलों को बेनकाब कर रही है। इससे भाजपा के पक्ष में नैरेटिव बन रहा है। इंडिया गठबंधन के दलों को लग रहा है कि लोकसभा में उनके नंबर बढ़ने से उन्हें एक तरह से जनता ने जनादेश दे दिया है इसी वजह से समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रीय जनता दल और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता उन्माद में आकर अराजक व्यवहार कर रहे हैं।
इसके अलावा महाराष्ट्र और हरियाणा में विपक्षी दल आपस में ही गुत्थमगुत्था हैं। हरियाणा में आम आदमी पार्टी पूरी ताकत से चुनाव मैदान में हैं। अरविंद केजरीवाल को भूमिपुत्र बताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और सुनीता केजरीवाल के नेतृत्व में वहां आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता बेहद एक्टिव मोड पर हैं। खास बात यह है कि आम आदमी पार्टी की सभाओं में कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना लगाया जाता है। हरियाणा में कांग्रेस को उसके नेताओं की आपसी खींचतान भी भारी पड़ रही है।
वहां भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी पार्टी चल रहे हैं तो कुमारी शैलजा अपने हिसाब से काम कर रही हैं। उधर राहुल गांधी की कोटरी में शामिल राज्यसभा सदस्य रणदीप सुरजेवाला अपना चूल्हा अलग पका रहे हैं। इन सबके अलावा जाटों को बांटने के लिए देवीलाल के कुनबे की तीन पार्टियां अलग से लड़ रही हैं। इसी तरह महाराष्ट्र में भी महा विकास अघाडी के घटक कांग्रेस और एनसीपी उद्धव ठाकरे को चुनाव के पहले मुख्यमंत्री घोषित करने के पक्ष में नहीं है।जबकि उद्धव ठाकरे ने जिद पकड़ ली है कि जल्दी से जल्दी उन्हें सीएम फेस बनाया जाए।
जम्मू कश्मीर और हरियाणा में जल्दी चुनाव कराने और झारखंड तथा महाराष्ट्र में बाद में चुनाव होने का लाभ भी भाजपा को मिलेगा। हरियाणा में अभी भी सबसे बड़ा दल भाजपा ही है। जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में भी जम्मू डिवीजन के कारण भाजपा को ही सबसे ज्यादा सीटें मिलने की संभावना है। यदि जम्मू कश्मीर और हरियाणा दोनों स्थानों पर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई तो इसका असर झारखंड और महाराष्ट्र पर भी पड़ेगा। दोनों ही राज्यों में अभी भी भाजपा विपक्षी दलों से आगे है। महाराष्ट्र में भी भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति को लोकसभा चुनाव में नुकसान जरूर हुआ है लेकिन अभी भी महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा ही है, जो राज्य के सभी अंचलों में में दबदबा रखती है। जाहिर है विपक्षी दल अपनी हरकतों के कारण भाजपा को रिवाइवल का मौका दे रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस ने गुंडागर्दी की सारी हदें पार कर दी
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने गुंडागर्दी की सारी हदें बाद कर दी। पश्चिम बंगाल में बिहार से भी ज्यादा भयावह जंगल राज नजर आ रहा है। ऐसा लगता है ममता बनर्जी गुंडों की डॉन की तरह सरकार चल रही हैं। पश्चिम बंगाल की घटनाओं और बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं के उत्पीड़न की वजह से देश में इन दिनों हिंदू सेंटीमेंट उभार पर है। स्वाभाविक रूप से इसका लाभ भाजपा को मिल रहा है। कोलकाता में डॉक्टर बेटी के साथ जिस पाशविक तरीके से वारदात हुई उससे पूरा देश उद्वेलित है। खास तौर पर शहरी मध्यम वर्ग को लग रहा है कि उनकी बेटियां विपक्षी दलों के राज्यों में सुरक्षित नहीं है। पश्चिम बंगाल की घटनाओं के कारण इंडिया गठबंधन पूरी तरह से बैक फुट पर है। राहुल गांधी पश्चिम बंगाल पर 4 दिन बाद बोलते हैं वह भी गोलमोल। जबकि प्रियंका गांधी ममता बनर्जी की आलोचना करने से बचाती हैं।वो भी इधर-उधर की बातें करते हुए पश्चिम बंगाल की घटनाओं पर टिप्पणी देती नजर आती हैं। निर्भया कांड के विरोध को हवा देकर दिल्ली में स्थापित हुई आम आदमी पार्टी भी पश्चिम बंगाल की घटनाओं पर कुछ नहीं बोलती। जाहिर है विपक्षी दल अपनी हरकतों से भाजपा को फिर से मजबूत होने का मौका दे रहे हैं।
दुष्कर्म की घटनाओं के कारण सपा भी बैक फुट पर
उत्तर प्रदेश में 37 लोकसभा सीट जीतकर समाजवादी पार्टी नए सिरे से स्थापित हुई थी। ऐसा लग रहा था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव योगी आदित्यनाथ को सत्ता से बाहर कर देंगे, लेकिन उत्तर प्रदेश में जिस तरह से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता उन्माद में आ गए हैं, उससे भाजपा को फायदा हो रहा है। समाजवादी पार्टी के दो नेता अलग-अलग शहरों में दुष्कर्म के आरोप में फंस गए हैं। अयोध्या और कन्नौज में हुई दुष्कर्म की दर्दनाक घटनाओं में समाजवादी पार्टी के प्रमुख पदों पर रहे नेताओं पर आरोप लगने की वजह से सपा पूरी तरह से बैक फुट पर है। खास बात यह है कि ममता बनर्जी की तरह अखिलेश यादव भी अपने गुंडे नेताओं को बचा रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की हरकतों का पूरा लाभ भाजपा को मिल रहा है। योगी आदित्यनाथ फुल फॉर्म में है। भाजपा ने अपने नेताओं का आपसी झगड़ा भी सुलझा लिया हैं। पिछले दिनों केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेकर खुलकर उनकी प्रशंसा की। जबकि अभी तक केशव प्रसाद मौर्य योगी आदित्यनाथ का नाम लेने से बचते रहे हैं। यहां तक कि वे योगी की बैठकों में भी नहीं पहुंच रहे थे । दो बार तो उन्होंने मंत्रिमंडल की बैठक का भी बहिष्कार किया। लेकिन दिल्ली के डंडे के बाद दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक पूरी तरह से काबू में आ गए हैं।