सेना में भर्ती के लिए केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। बिहार से शुरू हुआ विरोध अब यूपी, हरियाणा, हिमाचल समेत अन्य राज्यों तक पहुंच गया है। हरियाणा के रोहतक में इस योजना के विरोध में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली।
गुरुवार को भी कई स्थानों पर सेना की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने तोड़फोड़ की। कई स्थानों पर पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी तकरार भी हुई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लम्बे समय से परीक्षा की तैयारी है और ये तैयारी वो केवल चार साल के लिए नौकरी करने के लिए नहीं कर रहे। जब चार साल में सरकार रिटायर्ड कर देगी तो हम लोग उसके बाद कहां जाएंगे?
साथ ही अभ्यर्थियों का विरोध इस बात पर भी है कि अब सेना में जितनी भी भर्तियां होंगी, वो अग्निपथ स्कीम के तहत ही होंगी। पुराने मेडिकल या फिजिकल टेस्ट को नहीं माना जाएगा। भर्ती के लिए युवाओं को अग्निपथ स्कीम के तहत ही अप्लाई करना होगा।
अभ्यर्थियों की मांग है कि केंद्र सरकार 'अग्निपथ योजना' को तत्काल वापस ले। उनका कहना है कि इस योजना से देश सेवा का जज्बा पाले युवाओं का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।
अभ्यर्थियों के मुताबिक सेना में यदि इस तरह संविदा आधार पर भर्ती देश की रक्षा के साथ खिलवाड़ भी है।
गौरतलब है कि 14 जून को केंद्र सरकार ने सेना की तीनों शाखाओं (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) में युवाओं की बड़ी संख्या में भर्ती के लिए अग्निपथ भर्ती योजना की घोषणा की है। इसके तहत नौजवानों को सिर्फ 4 साल के लिए डिफेंस फोर्स में सेवा देनी होगी
माना जा रहा है कि सरकार ने ये कदम तनख्वाह और पेंशन का बजट कम करने के लिए उठाया है।