बढ़ती महंगाई, तेल की रिकॉर्ड तोड़ कीमत और पिछले कई महीनों से अस्थिर राजनीतिक माहौल के कारण पाकिस्तान आर्थिक बरबादी की ओर बढ़ रहा है। अपनी खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को पाकिस्तान संभालने में जुटा जरूर है पर इसमें कामयाब होता नहीं दिख रहा है। हमारे इस पड़ोसी देश के सामने श्रीलंका की तरह आर्थिक दलदल में फंसने की आशंका गहरा गई है। पाकिस्तान दीवालिया होने की कगार पर है और वहां महज 2 माह के ही पैसे बचे हैं. देश के कई शहरों में पेट्रोल खत्म हो चुका है और ATM खाली पड़े हैं।
पाकिस्तान की सरकार ने सभी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमत 30 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी है। इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने यहां अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस बढ़ोतरी के कारण अब पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल 180 रुपए, डीजल 174 रुपए प्रति और केरोसिन 156 रुपए प्रति लीटर में आ रहा है।
पाकिस्तान सरकार दरअसल IMF से कर्ज पाने के लिए आम जनता पर महंगाई का बोझ लाद रही है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत बढ़ने से पाकिस्तान में महंगाई और ज्यादा बढ़ने की संभावना है।
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तानी सरकार अब 1 जून से बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है। माना जा रहा है कि बिजली की कीमत में 12 रुपये प्रति यूनिट तक की वृद्धि हो सकती है. बिजली सब्सिडी खत्म करने से भी रेट बढ़ेंगे।
पाकिस्तान नकदी की तंगी से जूझ रहा है. उसका विदेशी मुद्रा भंडार 10.1 अरब डॉलर ही रह गया है। इतने कम विदेशी मुद्रा के कारण पाकिस्तान के पास जरूरी चीजों के आयात के लिए केवल दो माह का ही पैसा बचा है। पेट्रोल-डीजल समेत जरूरी चीजों के लिए पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घटता जा रहा है। देश को इस बड़े आर्थिक संकट से बचाने के लिए पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने आपात आर्थिक योजना लागू कर दी है। इसके तहत देश में तीन दर्जन से ज्यादा गैरजरूरी व लग्जरी वस्तुओं के आयात पर पाबंदी लगा दी गई है।