भोपाल: प्रदेश में पंचायत चुनाव खत्म हो गए हैं और अब गांवों में सम्पत्ति कर एवं हाट बाजार फीस की वसूली शुरु होगी। इसके लिये राज्य के पंचायत विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने सभी जिला कलेक्टरों एवं जिला व जनपद पंचायतों के सीईओ को निर्देश जारी कर दिये हैं।

जारी निर्देशों में कहा गया है कि पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनकी स्वयं की आय में निरंतर वृद्धि होना अत्यंत आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को गुणवत्ता पूर्ण जनसुविधायें उपलब्ध कराये जाने हेतु इन करों तथा फीस आदि का अधिरोपण एवं संकलन अतिआवश्यक हो गया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण ग्राम सभा द्वारा अधिरोपित किये जाने वाले अनिवार्य करों में सम्मिलित संपत्ति कर है।

संघ या राज्य सरकार, ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या जिला परिषद के स्वामित्व के या उसमें निहित भवन तथा भूमियों, धार्मिक या शैक्षणिक प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाये जाने वाले भवन तथा भूमियां या उनका कोई भाग जिनके अंतर्गत बोर्डिंग हाऊस भी हैं, को छोडक़र अन्य भूमियों या भवनों या दोनों पर, जिनका पूंजी मूल्य भूमि के मूल्य को सम्मिलित करते हुए, छह हजार रूपये से अधिक हो, संपत्ति कर वसूला जाये। इसके अलावा, ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित समस्त निजी आवासीय एवं व्यवसायिक संपत्तियों के साथ-साथ ऐसे समस्त संस्थान जो कि निगम, मण्डल, कंपनी, बोर्ड, ट्रस्ट एवं प्राधिकरण आदि के रूप में कार्य कर रहे हैं, जैसे कि विद्युत वितरण कंपनियां, पर्यटन विकास बोर्ड, वनोपज सहकारी संघ, औधोगिक विकास निगम, खनिज विकास निगम, कृषि विपणन बोर्ड आदि की पंचायत क्षेत्र में स्थित संपत्तियों को भी संपत्ति कर निर्धारण एवं संकलन प्रक्रिया में सम्मिलित किया जावे।

जारी निर्देशों में कहा गया है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित बाजारों से फीस वसूली के लिए प्रभावी कार्यवाही की जाये। ये तथ्य सामने आये हैं कि प्रदेश की अधिकांश ग्राम पंचायतों के द्वारा अनिवार्य श्रेणी में सम्मिलित होने के बाद भी बाजार फीस का निर्धारण एवं संकलन नहीं किया जा रहा है। इसके लिये  अभियान रूप में सघन सर्वे कर समस्त ग्राम पंचायतों में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों तथा अन्य स्थायी बाजारों, दुकानों एवं शोरूम, मॉल्स आदि प्रतिष्ठानों की जानकारी संकलित की जावे। साथ ही यह जानकारी पंचायत दर्पण पोर्टल पर ऑनलाईन भी संधारित की जाये। पंचायत दर्पण पोर्टल पर इन दैनिक बाजारों, स्थायी बाजारों एवं शोरूम, मॉल्स आदि के जियो टैग, फोटो ग्राफ्स भी अनिवार्य रूप से अपलोड किये जावे।

यह कार्यवाही 31 जुलाई 2022 तक अनिवार्यत: पूर्ण कर ली जाये। इस कार्यवाही के पश्चात समस्त ग्राम पंचायतों में अनिवार्य रूप से बाजार फीस निर्धारित कर देय दिनांक से मांग पत्र तैयार कर सर्वसंबंधितों को जारी किये जाकर उसकी वसूली नियमित रूप से की जाने पर विशेष ध्यान दिया जावे। यह देखा गया है कि प्रदेश के बड़े नगरों के निकट स्थित ग्राम पंचायतों में संचालित मॉल, शोरूम तथा हाट/बाजारों के विस्तार होने के बाद भी बाजार फीस संकलन अत्यंत ही कम है। इसलिये ऐसी ग्राम पंचायतों को चिन्हित कर बाजार फीस निर्धारण एवं संकलन के वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किये जाकर लक्ष्य प्राप्ति की निरंतर समीक्षा की जावे।

यदि ग्राम पंचायत द्वारा हाट बाजारों से फीस की वसूली हेतु सार्वजनिक नीलामी की जाती हो तो इस संबंध में पूर्ण पारदर्शिता अपनाते हुए प्रावधानों का पालन किया जाये। बाजार फीस के रूप में प्राप्त होने वाली समस्त राशियों की रसाीद अनिवार्य रूप से प्रदान की जाये। बाजार फीस कैशलैस रूप से प्राप्त करने के लिए ग्राम पंचायतों द्वारा उनके एकल खाता बैंक के साथ समन्वय कर यूपीआई, क्यूआर कोड तथा पीओएस मशीन का अधिकाधिक उपयोग किया जाये। फीस तथा अन्य कर वसूल करने के आधार पर ग्राम पंचायतों की ग्रेडिंग की जाकर प्रसारित की जाये, जिससे कि प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न हो तथा ग्रेडिंग में पिछड़ रही पंचायतें भी प्रयास प्रारंभ कर सकें।