बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ़्तारी के बाद उसे छतरपुर के कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जमानत दे दी गई है.
जानिए पूरा मामला?
पंडित धीरेंद्र शास्त्री के छोटे भाई सौरभ गर्ग उर्फ शालिग्राम पर एक दलित परिवार को गाली देने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा था. रिपोर्ट के मुताबिक, बाबा बागेश्वर के भाई का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वो एक दलित परिवार के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता हुआ दिखाई दे रहा हैं.
आरोप है कि सौरभ गर्ग मुंह में सिगरेट और एक हाथ में रिवॉल्वर लेकर परिवार को धमका रहा था. जानकारी के मुताबिक, जब यह घटना हुई, उस वक्त परिवार में एक बेटी की शादी चल रहीं थी. सौरभ गर्ग ने रिवाल्वर दिखाकर एक दलित परिवार के सदस्य को जान से मारने की धमकी भी दी थी. इस पूरी घटना का किसी ने वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. यह पूरी घटना 11 फरवरी की है.
जानिए पूरे घटनाक्रम के पीछे का कारण-
बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर 'सामूहिक विवाह सम्मेलन' का आयोजन किया गया था. जिसमें करीब 121 गरीब कन्याओं का विवाह कराया गया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दलित परिवार को अपनी बेटी की शादी बागेश्वर धाम में करने की बात भी कही गई थी, लेकिन परिवार ने इनकार कर दिया था. इस पर सौरभ गर्ग भड़क गए और दलित परिवार की शादी में पहुंचकर उन्हें धमकाने लगे. जिसका वीडियो वायरल होने के 13 दिन बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर छतरपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जमानत दे दी गई.
वायरल वीडियो पर पुलिस ने लिया था एक्शन-
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सालिगराम पर मारपीट, धमकाना, जान से मारने की धमकी, संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसी IPC 294, 323, 506, 427 एवं 3(1) द 3(1) ध 3(2)v क एससी एसटी एक्ट की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. बता दें कि परिवार के बयानों के आधार पर मामले में IPC 336, 25/27 आर्म्स एक्ट की धाराएं बढ़ाई गई थीं.
विशेष न्यायाधीश उपेंद्र प्रताप सिंह ने दी जमानत-
शालिग्राम गर्ग और इस घटना में शामिल जीतेंद्र तिवारी को विशेष न्यायाधीश उपेंद्र प्रताप सिंह की बेंच के सामने पेश किया गया था. उन्हें धारा 3 (1) एससी एसटी अधिनियम 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत कोर्ट में पेश किया गया था. फरियादी की सभी बातों को सुनने के बाद न्यायालय के सामने आरोपी के वकील शासकीय अधिवक्ता के द्वारा तर्क रखे गए. जिसके बाद विशेष न्यायाधीश ने दोनों को जमानत दे दी.