पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया जिस मामले को कथित तौर पर दबाकर अनभिज्ञ बैठे रहे उस मामले में मप्र के उच्च न्यायालय ने एक सप्ताह के भीतर तीन बार सुनवाई की|  भोपाल दुग्ध संघ के जिस सीईओ आरपीएस तिवारी को संरक्षण देते रहे थे उन पर कार्रवाई के रास्ते खुल गए। इसके चलते एमपीसीडीएफ के नए प्रबंध संचालक संजय गुप्ता ने तिवारी को निलंबित कर दिया है। पंकज पांडे को बखार्स्त किया है। यह कार्रवाई व्यापम परीक्षा से जुड़े एक मामले में की है। मामला तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणा गुप्ता और तत्कालीन समय में महाप्रबंधक प्रशासन रहे आरपीएस तिवारी द्वारा मिलकर एमपीसीडीएफ में अवैध भर्ती से जुड़ा है। इस मामले में डीओपीटी पहले से ही अरुणा गुप्ता की जांच कर रही है लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इतने गंभीर मामले में लोकायुक्त पूर्व में खात्मा लगा चुकी है। 

उल्लेखनीय है कि एमपीसीडीएफ में 46 पदों पर भर्ती की थी। यह भर्ती 2016 से 2018 के बीच की थी। भर्ती से पहले व्यापमं ने फरवरी 2016 में चयन परीक्षा ली थी। जिसकी मैरिट सूची 13 जुलाई 2016 में को एमपीसीडीएफ को दे दी थी। इस सूची पर 18 माह तक ही भर्ती की जा सकती थी जिसकी अवधि 13 जनवरी 2018 को खत्म हो गई थी। इस सूची में पंकज पांडे का नाम वेटिंग में था। अवधि खत्म होने के बाद 22 सितंबर 2018 को अरुणा गुप्ता व आरपीएस तिवारी समेत अन्य ने मिलकर पंकज पांडे को नियुक्ति दे दी। अरुणा गुप्ता तब एमपीसीडीएफ की प्रबंध संचालक थी जिनके सामने तिवारी ने पंकज पांडे को नियुक्ति दिए जाने संबंधी नस्ती प्रस्तुत की थी। इस मामले की मुख्यमंत्री से लेकर तमाम स्तर पर शिकायत हुई थी जिसके बाद पंकज पांडे पर कार्रवाई की गई तो वह हाईकोर्ट चले गए थे जहां हाईकोर्ट ने उन्हें राहत नहीं दी थी। इस मामले में 13 अप्रैल को सुनवाई थी। एमपीसीडीएफ की ओर से जवाब पेश किया था लेकिन हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं था। हाईकोर्ट ने आपत्ति दर्ज कराई थी और तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया था जबकि एमपीसीडीएफ की तरफ से 30 दिन का समय मांगा था जो कि नहीं दिया गया और तुरंत कार्रवाई कर कोर्ट को अवगत कराने के लिए कहा गया था। जिसके बाद मंगलवार को कार्रवाई की गई है। हालांकि अफसर आधिकारिक तौर पर टिप्पणी से बच रहे हैं।

अपनों की चयन सूची बनाकर अपने लोगों को नियुक्ति देने के मामले में कार्रवाई बाकी

जिस सूची के आधार पर पंकज पांडे की भर्ती की गई थी उस सूची के आधार पर 45 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भी भर्ती की गई थी। इस भर्ती प्रक्रिया के लिए अरुणा गुप्ता व आरपीएस तिवारी को अलग-अलग विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर चयन समिति बनाना थी लेकिन इन्होंने एमपीसीडीएफ के ही शाखा प्रमुखों की सूची बना दी और 45 मुख्य पदों पर अपने लोगों को नियुक्ति दे दी। इस मामले में अभी कारवाई बाकी है। हालांकि शिकायत के बाद डीओपीटी अरुणा गुप्ता की इस मामले में जांच कर रहा है । बताया जा रहा है कि इस मामले में बड़ा खेल हुआ है। यदि विशेषज्ञों की चयन सूची बनाई गई होती तो उसी समय पंकज पांडे की नियुक्ति को रोका जा सकता था. लेकिन नहीं रोका गया।

पूर्व में विभागीय मंत्री की नोटशीट के बाद आईपीएस तिवारी का तत्कालीन एमडी शमीम उददीन ने ग्वालियर तबादला कर दिया था जिसे एसीसएस ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद तिवारी ने अपने हिसाब से दूध के दामों में एक रुपये की वृद्धि कर दी थी तब भी एसीएस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। जबकि एमपीसीडीएफ व सभी दुग्ध संघ पशुपालन विभाग व सहकारिता के अंतर्गत आते हैं।

एक प्रमुख सचिव व कई अधिकारियों पर भी उठ रहे सवाल

अवैध भर्ती से जुड़े मामले में एक तत्कालीन मुख्य सचिव पशुपालन व एमपीसीडीएफ के अन्य अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इन्होंने पूर्व में फर्जी भर्ती मामले में लोकायुक्त, हाईकोर्ट समेत अन्य को शिकायत के जवाब में बताया था कि व्यापम सूची की वैधता अवधि 12 दिसंबर 2018 थी जबकि वैधता अवधि 13 जनवरी 2018 की तक ही थी। तब यह जवाब एक तत्कालीन उप महाप्रबंधक प्रशासन की ओर से पशुपालन विभाग के एक तत्कालीन प्रमुख सचिव के माध्यम से दिलवाया गया था जिसके बाद लोकायुक्त ने उक्त गंभीर शिकायत पर खात्मा लगा दिया था।