सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को जुलाई-सितंबर में कुल 2,748.66 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. ये लगातार दूसरी तिमाही है, जब कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा है।
हुआ इतना घाटा: खबरों के मुताबिक, शेयर बाजारों को दी गई सूचना में तेल कंपनियों ने जुलाई-सितंबर तिमाही में हुए नुकसान के आंकड़े बताए. इसके मुताबिक, आईओसी ने 29 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए 272.35
करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया, FY23 की पहली तिमाही (वित्त वर्ष 2022-23 की अप्रैल-जून तिमाही ) में IOC को 1,992.53 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को लागत से कम दाम पर Petrol Diesel और कुकिंग गैस एलपीजी बेचने से ये नुकसान झेलना पड़ा है।
एचपीसीएल को फिर तगड़ा झटका: तीन नवंबर 2022 को एचपीसीएल ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 2,172.14 करोड़ रुपये के नुकसान की जानकारी दी है। जो अप्रैल-जून में अपने अबतक के सबसे अधिक 10,196.94 करोड़ रुपये के तिमाही नुकसान के बाद दर्ज किया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की तीसरी बड़ी पेट्रोलियम कंपनी बीपीसीएल का घाटा जुलाई सितंबर तिमाही में 304.17 करोड़ रुपये रहा, जबकि पहली तिमाही में 6,263.05 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
घरेलू हवाई किराया हुआ दोगुना तक महंगा
विमानन कंपनियों ने सरकार की ओर से किराये की उच्चतम सीमा हटाने के बाद तेजी से बढ़ोतरी शुरू कर दी है। सितंबर के मुकाबले इस साल दिसंबर में यात्रा के लिए कंपनियां कुछ महत्वपूर्ण मार्ग पर दोगुना तक ज्यादा किराया ले रही हैं। जबकि, दूसरी ओर विमानों की कमी से उड़ानों की संख्या घटने से यात्री पहले से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू यात्रियों को दिसंबर यात्रा सीजन में हवाई किराये राहत मिलने की उम्मीद कम है।
क्लियरट्रिप के प्रवक्ता ने कहा कि सर्दियों और नए साल की छुट्टियों के दौरान अक्टूबर और दिसंबर के बीच हवाई किराया उच्चतम स्तर पर होता है। उन्होंने कहा कि इस साल कीमतें अधिक मांग से प्रभावित हुई हैं, क्योंकि ज्यादातर लोग महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद अपनी छुट्टी की योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हवाई टिकट महंगा होने की एक प्रमुख वजह विमानों की कमी है, जिनमें से कुछ रखरखाव और इंजन से संबंधित मुद्दों के कारण बंद हो गए हैं।