राजस्थान में उदयपुर में मंगलवार को दिनदहाड़े दुकान में घुसकर कन्हैयालाल की हत्या करने के मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है. कन्हैयालाल साहू के बर्बर हत्याकांड में उदयपुर पुलिस की लापरवाही के आरोप उसके परिजन भी लगा रहे हैं। परिवार का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते कन्हैयालाल की शिकायत पर कार्रवाई करती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। पूरे घटनाक्रम में लापरवाही बरतने के आरोप में अब धानमंडी थाने के ASI भंवरलाल को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले में एक और पुलिसकर्मी की भूमिका की जांच की जा रही है।
नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट के बाद से ही कन्हैयालाल को लगातार धमकियां मिल रही थीं। उसको आशंका थी कि उसकी हत्या कर दी जाएगी। हाल ये था कि दूसरे समुदाय के लोग सोशल मीडिया पर खुलेआम कह रहे थे कि इसे जान से मार दो। इस डर से उसने पुलिस से मदद भी मांगी थी। 15 जून को धानमंडी थाने में बाकायदा शिकायत की थी। डर के कारण कई दिन तक उसने दुकान भी नहीं खोली। इधर पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद सहमति बन गई थी। गौरतलब है कि पेशे से दर्जी कन्हैयालाल का धारदार हथियार से गला काट दिया गया। इस बर्बर हत्याकांड में दो दरिंदे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
कन्हैयालाल की एक DP से इस विवाद की शुरुआत हुई। कन्हैयालाल ने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की DP लगा रखी थी। इस पर उसे लोगों से धमकियां मिलने लगीं। पुलिस को 15 जून को दी शिकायत में उसने बताया था कि करीब 6 दिन पहले मेरे बेटे से मोबाइल पर गेम खेलते हुए कुछ पोस्ट हो गया था। इसकी जानकारी मुझे बिल्कुल नहीं थी। पोस्ट और DP लगाने के दो दिन बाद दो लोग मेरी दुकान पर आए और मोबाइल की मांग की। वे दोनों बोले- आपके मोबाइल से आपत्तिजनक पोस्ट डाली गई है। मैंने कहा कि मुझे तो मोबाइल चलाना ही नहीं आता है। मोबाइल से मेरा बच्चा गेम खेलता रहता है। उसी से कुछ हो गया होगा। इसके बाद विवादित पोस्ट भी डिलीट कर दी गई थी। तब उन लोगों ने कहा कि आइंदा से ऐसा मत करना।
कन्हैया की शिकायत में बताया गया कि 11 जून को उसे धानमंडी थाने से फोन आया। वहां से कहा गया कि आपके खिलाफ एक रिपोर्ट दर्ज हुई है। थाने आ जाओ। जब मैं थाने गया तो पता चला कि पड़ोसी नाजिम ने ही रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उसने कहा कि रिपोर्ट समाज के दवाब में की गई है। मुझे भी पता है कि आपको मोबाइल चलाना ही नहीं आता।' कन्हैयालाल के अनुसार, पुलिस के समझौता कराने के बाद शिकायत करने वाले पड़ोसी के साथ अन्य कई लोग उसकी दुकान की रेकी करने लगे थे। उसे दुकान तक नहीं खोलने दे रहे थे। ऐसे में उसे आशंका हो गई थी कि दुकान खुलते ही ये लोग उसे मारने की कोशिश करेंगे। ये लोग लगातार धमकी दे रहे थे कि यह व्यक्ति कहीं दिखे तो इसे जान से मार दो।
कन्हैयालाल ने शिकायत में साफ आशंका जताई थी कि दुकान खुलते ही ये मुझे मार देंगे। धानमंडी थाने के ASI भंवरलाल की मौजूदगी में दोनों पक्षों में बाकायदा समझौता कराया गया था। कन्हैयालाल ने लिखकर दिया कि 5 लोगों की शिकायत के बाद मुझे गिरफ्तार किया। अब इन लोगों से मेरी बातचीत के बाद समझौता हो गया है। मैं कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहता हूं। इस समझौता पत्र में 5 लोगों के मोबाइल नंबर दर्ज किए गए हैं। इसके बावजूद कन्हैया को वाट्सऐप कॉल पर लगातार धमकियां मिलती रहीं, उसकी भी थाने में शिकायत की गई। इस पर भी ASI ने कोई ध्यान नहीं दिया। पुलिस ने कहा कि समझौता हो गया है, अपना ध्यान रखो, कुछ लगे तो बता देना।