करणी सेना का 8 जनवरी जन आंदोलन जंबूरी मैदान से होते हुए बीते तीन दिनों से लगातार भोपाल के भेल चौराहे पर जारी है. पिछले विधानसभा चुनाव 2018 में सरकार की नींद उड़ा देने वाला ‘माई का लाल’ शब्द अब एक बार फिर अगले विधानसभा चुनाव से करीब 10 महीने पहले ही राजधानी भोपाल में सुनाई देने लगा है.

मध्यप्रदेश के दोनों ही मुख्य राजनीतिक दल बीजेपी और कांग्रेस इस मुद्दे पर बड़े सोच विचार के साथ ही आगे कदम रख रहें हैं. क्योंकि एक ग़लत बयान उन्हें अगले विधानसभा चुनाव में बड़े भारी नुकसान की तरफ धकेल सकता हैं.

राजनीतिक दलों को चाहिए सवर्णों का साथ-

करणी सेना की 21 सूत्रीय मांगों पर कांग्रेस की तरफ से कमलनाथ ने सबसे पहले बयान जारी कर समर्थन तो किया लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि 2023 में कांग्रेस की सरकार बनेगी तो इन मांगों को लागू किया जाएगा या नहीं? बल्कि कमलनाथ ने मिशन-2023 को ध्यान में रखते हुए प्रेस कांफ्रेंस कर शिवराज सरकार पर निशाना साधते हुए सिर्फ इतना ही कहा कि लोगों को दबाने और परेशान करने से कुछ नहीं होगा बल्कि सरकार को उनकी ज़रूरी बाते सुननी चाहिए, उनपर विचार कर जो जायज मांगे हैं उन्हें तुरंत मान लेना चाहिए क्योंकि ये आंदोलन बीजेपी के खिलाफ हैं इसका कांग्रेस से कोई लेना देना नहीं है. 

तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इन 21 सूत्रीय मांगों पर 8 जनवरी से ही चुप्पी साधे हुए थी लेकिन आज गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी कांग्रेस की तरह ही जन आंदोलन का समर्थन तो किया लेकिन 21 सूत्रीय मांगों पर शिवराज सरकार की क्या भूमिका रहेगी इस पर चुप्पी साधे रखी.

कुल मिलाकर दोनों ही राजनीतिक पार्टियां चुनावी साल में कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती जिससे की उनका वोट बैंक बिगड़ जाए. इसलिए ना तो पार्टियां खुलकर समर्थन कर रहीं हैं और ना ही मना कर पा रही है क्योंकि राजनीति सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक का ही खेल हैं. इस आंदोलन से सरकार की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं.

मिशन-2023 से पहले करणी सेना का बड़ा बयान-

करणी सेना के मुखिया जीवन सिंह शेरपुर का साफ़ तौर पर कहना है कि अगर सरकार हमारी मांग नहीं मानती है तो करणी सेना अगले विधानसभा चुनाव में नई पार्टी बनाकर मैदान में उतरकर मौजूदा सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता तक दिखाने का काम करेगी. फिर उसके बाद इन 21 सूत्रीय मांगों को मनवाया जायेगा. 

साथ ही करणी सेना हरदा जिला अध्यक्ष सुनील सिंह का कहना है कि अगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो 2023 के विधानसभा चुनाव में उनकी कुर्सी तक डगमगाने लग जाएगी. उनके किसी भी नेता को चुनाव में प्रचार करने नहीं दिया जायेगा.

 

जीवन सिंह शेरपुर के नेतृत्व में आंदोलनकारी 9 जनवरी की सुबह जंबूरी मैदान से निकलकर महाराणा प्रताप चौक की तरफ जाने लगे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें भेल चौराहे पर ही बैरिकेट लगाकर रोक दिया. तभी से करणी सेना का आंदोलन लगातार तीन दिन से सड़क पर ही जारी हैं. इस आन्दोलन में जीवन सिंह समेत करीब 5 लोग भूख अनशन पर हैं.

करणी सेना परिवार की 21 सूत्रीय मांग-


करणी सेना की 21 सूत्रीय मांगों में दो प्रमुख मांग आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू हो, साथ ही Sc-St एक्ट में संशोधन कर जांच के बाद ही गिरफ्तारी का प्रावधान किया जाये शामिल हैं. फ़िलहाल करणी सेना का आंदोलन चौथे दिन भी जारी हैं. करणी सेना का कहना है कि अभी 8 जनवरी जितनी संख्या तो नहीं है लेकिन एक आवाज पर फिर से उतने ही लोग भोपाल में दिखाई देने लग जायेंगे.

क्यों नहीं बन रही सरकार से सहमति?

करणी सेना का कहना है कि 21 सूत्रीय मांगों में से हमारी जो दो प्रमुख मांगें हैं वह केंद्र सरकार के स्तर पर है उन पर राज्य सरकार सिर्फ विचार करें और बाकी मांगों को पूरा किया जाये. इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित हो, उसमें सरकार के साथ-साथ सर्व समाज के लोगों को भी शामिल किया जाये. 

फ़िलहाल कई दौर की वार्ता के बाद शिवराज सरकार ने इस पर सहमति तो जताई हैं लेकिन कोई लिखित आवेदन अभी तक जारी नहीं किया है. बता दें कि करणी सेना ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि सरकार की तरफ से जो भी सहमति बनें, उसे लिखित में दिया जाये.