अमरावती सांसद नवनीत राणा और बडनेरा विधायक उनके हसबैंड रवि राणा ने कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने की घोषणा की थी..!

मुंबई पुलिस ने 23 अप्रैल को नवनीत राणा और रवि राणा को गिरफ्तार किया था। और इन दोनों नेताओं के खिलाफ देशद्रोह की धारा 124 ए और 153 ए समेत कुछ अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है|

इसके बाद से ही महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच ज़ोरदार राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है| महाराष्ट्र में दोनों पार्टियों के नेताओं की ओर से आक्रामक बयानबाजी का क्रम जारी है|

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार -''अगर आप हनुमान चालीसा पढ़ना चाहते हैं, तो इसे घर पर ही पढ़ें|'' क्या आपके पास घर नहीं है? ||| बहुत सारे लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।'

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर कहा है: "अगर महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा नहीं बोली जाती है, तो क्या यह पाकिस्तान में बोली जाएगी। वे हनुमान चालीसा से इतनी नफरत क्यों करते हैं ।"

नवनीत राणा के खिलाफ कार्रवाई का विरोध करते हुए फडणवीस ने कहा, हजारों लोग एक महिला को दबाने के लिए जमा हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है।'

अगर हनुमान चालीसा बोलना देशद्रोह है तो हम में से हर कोई यह देशद्रोह करेगा। हम सब हनुमान चालीसा बोलेंगे। अगर सरकार में हिम्मत है तो सरकार हमारे खिलाफ देशद्रोह का मामला बनाकर दिखाए।

वहीं गिरफ्तारी के बाद नवनीत राणा ने मुंबई पुलिस पर जाति के आधार पर गाली-गलौज करने का आरोप लगाया है| हालांकि, मुंबई पुलिस कमिश्नर ने इस दावे के खिलाफ एक वीडियो जारी किया है जिसमें नवनीत राणा चाय पीती नजर आ रही हैं।

नवनीत राणा के वकील रिजवान मर्चेंट ने मुंबई पुलिस द्वारा जारी एक वीडियो का जवाब देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल की शिकायत सांताक्रूज पुलिस स्टेशन से संबंधित थी और उन्हें खार पुलिस स्टेशन में चाय परोसी गई थी।

क्या अमरावती से सांसद नवनीत राणा 2019 से बीजेपी और शिवसेना के बीच चल रही सियासी खींचतान में नया मोहरा हैं|

क्या बीजेपी नवनीत राणा को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रही है|

नवनीत राणा ने एनसीपी के समर्थन से शिवसेना सांसद आनंदराव अडसुल को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हराकर चार बार जीत हासिल की। लेकिन अब वे बीजेपी के साथ दिख रही हैं| 

फडणवीस सीएम बनने के लिए बहुत उत्सुक हैं। 

नवनीत राणा अमरावती से हैं जो विदर्भ में हैं। देवेंद्र फडणवीस विदर्भ नागपुर से हैं और उनके कई रिश्तेदार अमरावती से हैं। ऐसे में उनके बीच कोई न कोई कनेक्शन बन जाता है। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को राणा की गिरफ्तारी और उनके साथ हुए कथित अमानवीय व्यवहार पर महाराष्ट्र सरकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट की भी मांग की।

लेकिन सवाल यह है कि बीजेपी इस विवाद से क्या निकालना चाहती है| क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी और शिवसेना इस तरह आमने-सामने हुई हैं। इससे पहले कंगना रनौत के मामले को लेकर दोनों पक्ष आपस में भिड़ चुके थे। 

इस मुद्दे पर सड़क से लेकर टीवी चैनलों पर हाई वोल्टेज टेंशन देखने को मिल रही है|

बीजेपी के रुख की वजह आगामी बीएमसी चुनाव है| बीजेपी और शिवसेना के बीच संघर्ष 2019 से चल रहा है|

नवनीत राणा भले ही राकांपा के समर्थन से चुनाव जीत गई  हों, लेकिन हनुमान चालीसा का जो मुद्दा उन्होंने उठाया है, भाजपा राजनीतिक लाभ को देखते हुए उनका समर्थन कर रही है| ये सिर्फ बीएमसी चुनाव की बात नहीं है|

इस सरकार में शामिल होकर शिवसेना ने अपना रास्ता बदल लिया है| अब यह हिंदुत्व से हटकर धर्मनिरपेक्ष राजनीति की ओर बढ़ रही है। लेकिन शिवसेना हिंदुत्व की राजनीति को पूरी तरह से नहीं छोड़ पा रही है| ऐसे में बीजेपी शिवसेना की उलझन का फायदा उठाकर और बीएमसी चुनाव में हिंदुत्व की राजनीति पर एकाधिकार कर ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की कोशिश कर रही है|

2019 में शिवसेना ने 130 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से उसे 54 सीटें मिली थीं। लेकिन जिन सीटों पर वह हारे हैं, उन्हें एनसीपी या कांग्रेस ने हराया है|

2024 में चुनाव होने पर न तो कांग्रेस और न ही राकांपा अपनी सीट छोड़ेगी। ऐसे में इसे लेकर शिवसेना में आंतरिक असंतोष है| और जो हार गए वे छोटे नेता नहीं थे। ऐसे में अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो उनका राजनीतिक भविष्य बर्बाद हो जाएगा| ऐसे में ये लोग बीजेपी में जा सकते हैं|

बीजेपी इस मुद्दे को हवा देकर सियासत को एक नयी दिशा में ले जाना चाहती है| बीजेपी शिवसेना को हिन्दू विरोधी घोषित करने के लिए नवनीत का पूरा इस्तेमाल करेगी| ये एक ऐसा मुद्दा है जिसे शिवसेना ने सही ढंग से नही निपटा तो उसका पूरा आधार ख़त्म हो सकता है|