भोपाल: राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत शाला पूर्व शिक्षा नीति जारी कर दी। इसके अंतर्गत 3 से 6 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को गुणतापूर्ण शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार दिया गया है। आंगनवाड़ी केंद्र, शासकीय एवं निजी क्षेत्र में आने वाले शिशु गृह, प्ले स्कूल, शाला पूर्व शिक्षा केंद्र, नर्सरी स्कूल, किंडर गार्टन, प्रारंभिक स्कूल, बालवाड़ी और गृह आधारित देखरेख आदि ऐसे केंद्र जहां 3 से 6 वर्ष के बच्चों को दर्ज किया जाता है, पर यह नीति लागू होगी। इन्हें मान्यता देने का काम महिला एवं बाल विकास विभाग करेगा।

नीति में कहा गया है कि शाला पूर्व शिक्षा केंद्र में बच्चों को 3 से 4 घण्टे की अनौपचारिक शिक्षा दी जायेगी एवं उन्हें पूरक पोषण आहार जिसमें शामिल है गुड़ के साथ मूंगफली या गुड़ मिश्रित चना या स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फल का वितरण किया जायेगा।

इनका शतप्रतिशत टीकाकरण किया जायेगा एवं हेल्थ कार्ड भी बनाये जायेंगे। इन केंद्रों में बच्चों की किसी भी प्रकार से परीक्षा नहीं ली जायेगी तथा ये केंद्र सीधे मुख्य सडक़ पर न खुल सकेंगे और न ही खतरनाक क्षेत्र जैसे खदान, कारखाने, प्रदूषित इलाकों में बन सकेंगे।

नीति में कहा गया है कि शाला पूर्व शिक्षा केंद्र 150 की जनसंख्या तथा 3 से 6 वर्ष के दस बच्चे मिलने पर खोले जा सकेंगे। यदि संख्या कम है तो पास के केंद्र में जोकि आधा या एक तिहाई किमी ही दूर हो सकेगा, में प्रवेश दिया जायेगा। केंद्र में बच्चों के लिये रोचक पाठ्यक्रम, खेल सामग्रियां एवं खिलौने होंगे।

ये केंद्र जुलाई से मार्च तक नौ माह के लिये खुलेंगे। केंद्र में बच्चों को शारिक एवं मानसिक प्रताडऩा नहीं दी जा सकेगी तथा ऐसा करने पर जेजे एवं पास्को एक्ट के तहत कार्यवाही की जायेगी।