भोपाल. आयुर्विज्ञान मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर का नाता गड़बड़ियों से जुड़ता जा रहा है. यूनिवर्सिटी के मौजूदा कुलसचिव एवं सहायक कुलसचिव ने माइंड लॉजिक कंपनी की तरह ही नियमों को दरकिनार कर मेरीटेक प्राइवेट लिमिटेड को उपकृत करने की मंशा से ठेका दे दिया. विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस प्रक्रिया को लेकर विरोध के स्वर तेज कर दिए हैं. हालांकि कुलसचिव डॉ प्रभात बुधौलिया का कहना है कि ठेका देने से पहले सारे नियम प्रक्रियाओं का पालन किया गया है. छात्रों को जो प्रमाण पत्र ₹283 देकर मिलता था वह अब ₹95 फोन करने पर मिलेगा.



विश्वविद्यालय के मप्र स्टूडेंट यूनियन का कहना है कि कुलसचिव और सहायक कुलसचिव ने निजी कंपनी को सेवा का ठेका देने में नियमों की अवहेलना की है. यूनिवर्सिटी में धारा 51 लागू थी. पुरानी कार परिषद कमेटी भंग हो गई थी. 9 फरवरी को नए कार्य परिषद की नियुक्ति की गई. 22 फरवरी को टेंडर ओपन करने के लिए क्या समिति की बैठक की गई मगर कार में समिति के सदस्यों को शामिल नहीं किया गया. नियम के मुताबिक कार समिति के सदस्यों को शामिल किया जाना अनिवार्य था. यूनियन का कहना है कि विश्वविद्यालय पर नियम क्रमांक 3 के अनुसार एक लाख से अधिक के समस्त कार्यों के लिए कार्य परिषद द्वारा उनके सदस्यों में से 2 सदस्य का नाम निर्देशित करने का स्पष्ट प्रावधान है. धारा 51 के अंतर्गत 9 फरवरी द्वारा विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के सदस्य डॉ गीता गुड्डन और डॉक्टर राजेश धीरावाणी को सदस्य नामांकित किया गया. धारा 51 के तहत कार्य परिषद की पहली बैठक 3 मार्च 22 को आयोजित की गई. जबकि निजी कंपनी मेरी टेक सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाने की मंशा से क्रय समिति की बैठक 22 फरवरी को हुई. समिति ने कारी परिषद की गैरमौजूदगी में निजी कंपनी को ठेका देने का निर्णय ले लिया, जो कि नियम विरुद्ध है.

 *मामला न्यायालय में लंबित कर दिया 80 लाख का भुगतान*

 विश्वविद्यालय में घोटाले करने वाली निजी कंपनी माइंड लॉजिक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है. गड़बड़ी के चलते विश्वविद्यालय ने कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया है. इसके बाद भी कंपनी के रहते विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने 80 लाख का भुगतान कर दिया. जानकारों का कहना है कि यह भुगतान कोर्ट का निर्णय आने के बाद किया जाना चाहिए था. सूत्रों ने बताया कि माइंड लॉजिक कंपनी विश्वविद्यालय की डाटा ले गई है. इसके कारण छात्रों को मार्कशीट बनाने में विश्वविद्यालय को दिक्कत हो रही है.

*अब छात्रों को  ₹283 की जगह ₹95 में मिलेगी मार्कशीट*
 
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ पंकज बुधौलिया का कहना है कि निजी कंपनी को ठेका देने में कोई गड़बड़ी नहीं की गई है. नियमों का पालन किया गया है. टेंडर का ड्राफ्ट भी जबलपुर कमिश्नर एवं विश्वविद्यालय के कुलपति चंद्रशेखर बोरकर ने तैयार किया है. सारी प्रक्रिया उनकी देखरेख में संपादित की गई हैं. नई कंपनी से छात्रों को ही फायदा होने जा रहा है. जो मार्कशीट छात्रों को पहले ₹283 में मिला करती थी, अब मात्र ₹95 भुगतान कर हासिल की जा सकेगी.

 *होली के बाद बड़े आंदोलन की तैयारी*
 
यूनियन के अध्यक्ष अभिषेक पांडेय का कहना है कि होली के बाद इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करेंगे. इसके अलावा कोर्ट में भी याचिका दाखिल करेंगे. यूनियन अध्यक्ष ने दावा किया है कि नई कंपनी भी ब्लैक लिस्टेड बताई जा रही है.