आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 98वीं जयंती है, जिसे बीजेपी पूरे देश में 'सुशासन दिवस' के रूप में मना रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'अटल स्मृति स्थल' पहुंचकर पूर्व पीएम को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी अटल जी को श्रद्धांजलि दी. साथ ही अटल जी का पूरा परिवार भी वहां मौजूद रहा. 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत अन्य मंत्री और नेता 'सदैव अटल' पर पहुंच. बीजेपी ने सभी बूथों पर अटल जयंती को भव्य पैमाने पर मनाने का फैसला किया है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री की कविताओं पर आधारित काव्यांजलि कार्यक्रम भी शामिल होंगे. 

 'सदैव अटल' समाधि पर दी जा रही श्रद्धांजलि

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था. छात्र जीवन से ही उनकी राजनीतिक गतिविधियों में गहरी रुचि थी. उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और जेल भी गए थे. कॉलेज और स्कूली शिक्षा ग्वालियर से पूरी की और फिर उन्होंने विक्टोरिया कॉलेज, ग्वालियर से स्नातक किया. अटलजी ने कानपुर के डीएवी कॉलेज से कानून की पढ़ाई भी की थी. 

साल 2018 में 16 अगस्त को उनका निधन हो गया. एक अनुकरणीय राजनेता के रूप में जाने जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने 26 राजनीतिक दलों के साथ सरकार बनाई थी. 2014 में अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

इसके तुरंत बाद, मोदी सरकार ने घोषणा की कि अटलजी की जयंती को भारत में सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाएगा. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य नागरिकों और विशेष रूप से छात्रों को देश में एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता से अवगत कराना है.

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति में एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्हें चार अलग-अलग राज्यों से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने का गौरव प्राप्त है. अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकसभा में उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया था. 'सुशासन' के सूत्रधार ने प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करते ही स्वराज को सुराज में बदलने का संकल्प लिया था. हमेशा अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति में नैतिकता के उच्च मानक स्थापित करने वाले शिखर व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा.