नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सरकार ने नागरिकता सुधार अधिनियम (CAA) के खिलाफ विरोधी प्रदर्शनकारियों पर जारी वसूली नोटिस को वापस लेने का फैसला किया है। भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी सरकार को वसूल की गई राशि को वापस करने का निर्देश दिया है। यह राशि करोड़ों में है। यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीएए के खिलाफ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शुरू की गई वसूली नोटिस और कार्यवाही वापस ले ली गई है।
UP govt tells SC that all show-cause notices have been withdrawn against anti-CAA protesters
— ANI (@ANI) February 18, 2022
Apex court was hearing a plea seeking quashing of the recovery notices issued by UP admin to recover damage caused to public properties in connection with protests against CAA pic.twitter.com/6qOJcDAjF7
साल 2019 में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शन में हिंसा आगजनी और तोड़फोड़ भी हुई थी। इस दौरान सरकारी संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा था। इस मामले में यूपी सरकार ने प्रदर्शनकारियों को रिकवरी नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति डी.एस. वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने आज इस मामले पर सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार को यूपी रिकवरी ऑफ डैमेज टू प्रॉपर्टी एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी एक्ट के नए कानून के तहत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी अनुमति दी।
प्रदर्शनकारियों और सरकार को क्लेम ट्रिब्यूनल में जाने दिया जाना चाहिए। यूपी सरकार की अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने कहा कि इस मामले में वसूल की गई राशि को वापस करने का कोई आदेश जारी नहीं किया जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को मानने से इनकार कर दिया। वसूली का नोटिस वापस ले लिया गया है और कार्यवाही पूरी कर ली गई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यूपी सरकार द्वारा वसूल की गई राशि वापस की जानी चाहिए। यह राशि करोड़ों में हो सकती है।
शीर्ष अदालत ने 11 फरवरी को सीएए अधिनियम का विरोध करने वालों के खिलाफ यूपी सरकार द्वारा जारी वसूली नोटिस पर नाराजगी व्यक्त की थी। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार से वसूली की कार्रवाई को एक आखिरी मौका देते हुए वापस लेने को कहा था और चेतावनी दी थी कि अगर कार्रवाई वापस नहीं ली गई तो इसे रद्द कर दिया जाएगा क्योंकि यह नियमों के खिलाफ है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि हमारे आदेश में निर्धारित नियमों के मुताबिक कार्रवाई नहीं की गई।
आपकों बता दे कि, परवेज आरिफ टीटू की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिला प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नोटिस जारी किया था और आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के मुआवजे के रूप में वसूली का नोटिस जारी किया था। याचिकाकर्ता ने मामले में रिकवरी नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले में कुल 106 एफआईआर दर्ज की गई हैं और उनके खिलाफ 833 दंगा मामले दर्ज किए गए हैं। साथ ही 274 लोगों को रिकवरी नोटिस भी जारी किया गया है। यूपी सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने कहा कि इन 274 नोटिसों में से 236 मामलों में आदेश पारित किए गए हैं और 38 मामलों को बंद कर दिया गया है।