अभी संसदीय शब्दों पर विवाद थमा भी नहीं था कि संसद भवन परिसर और उसके आसपास धरना, अनशन और धार्मिक आयोजन भी प्रतिबंधित कर दिए गए। 
18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले जारी परिपत्र के मुताबिक़ सदस्य किसी भी प्रदर्शन, धरना, हड़ताल, अनशन या किसी धार्मिक समारोह के लिए संसद भवन के परिसर का उपयोग नहीं कर सकते हैं। 

राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी ने इस सर्कुलर को जारी किया है, जिसमें सदस्यों से सहयोग की अपेक्षा भी की गई है। वहीं परिपत्र जारी होते ही विपक्ष भड़क गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सर्कुलर को शेयर करते हुए लिखा कि "विश्गुरु की नवीनतम सलाह - Dharna (धरना) मना है-

वहीं राजद संसद मनोज कुमार झा ने भी सर्कुलर पर आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा- असंसदीय शब्दों की नई सूची के माध्यम से संसदीय विमर्श पर बुलडोजर चलाने के पश्चात अब वे नया तुगलकी फरमान आया कि आप संसद परिसर में किसी प्रकार का धरना, प्रदर्शन या अनशन आदि नही कर सकते।आज़ादी के 75वें वर्ष में ये हो क्या रहा है?पड़ोस के श्रीलंका से सीखिए हूजूर...जय हिंद
 

कुल मिलाकर सत्र से पहले बन रही परिस्थितियां यह बताने लगी हैं कि मानसून सत्र बेहद हंगामेदार होगा।