भोपाल: लोक अभियोजन संचालनालय के निदेशक अन्वेष मंगलम ने कुख्यात अपराधियों को सजा दिलाने के लिये डीजीपी को सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया है। डीजीपी को लिखे पत्र में निदेशक ने कहा है कि प्राप्त एक शिकायत के संदर्भ में परीक्षण पर पाया गया कि एक जिले में एक आरोपी के विरुद्ध एक ही थाने के गत 20 वर्षों में कुल लगभग 40 प्रकरण न्यायालयों में प्रस्तुत हुये।
इनमें से 15 प्रकरणों में आरोपी या तो दोषमुक्त हो गया अथवा राजीनामा हो गया अथवा केवल अर्थदण्ड हुआ। तमाम प्रयास के बावजूद भी 17 अन्य प्रकरणों का रिकार्ड प्राप्त नहीं हो पाया। 7 प्रकरण न्यायालयों में अभी भी विभिन्न स्टेज पर हैं। अधिकांश प्रकरण सामान्य धाराओं के हैं (धारा 307 के 2 प्रकरणों में दोषमुक्ति हो चुकी है)। आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में वर्तमान में लंबित प्रकरणों में डनहोंने भारसाधक अभियोजक को निर्देश दिये हैं कि वे पुलिस से सहयोग लेकर इनका प्राथमिकता से निराकरण करवायें और जिन प्रकरणों के रिकार्ड नहीं मिल रहे हैं उनके रिकार्ड खोजने के और ज्यादा प्रयास करें।
निदेशक ने पत्र में कहा है कि यदि सभी जिलों में सभी आदतन अपराधियों की सूची, उनके विरुद्ध पंजीबद्ध एवं न्यायालयों में प्रस्तुत अपराधों सहित तैयार कर ली जावे और जिला पुलिस अधीक्षक, जिला अभियोजन अधिकारी के साथ परामर्श कर उनमें भारसाधक लोक अभियोजकों को आवश्यक पुलिस सहयोग, पैरवी, संमंस-वारंट तामीली करा दें तो ऐसे चिन्हित एवं आदतन अपराधियों के विरुद्ध न्यायालय में कुछ प्रकरणों में अवश्य ही दोषसिद्धि के निर्णय प्राप्त हो सकते हैं। अभियोजन विभाग इन सभी प्रकरणों को संवर्गीय लोक अभियोजन अधिकारियों को अभियोजन हेतु आवंटित करा लेगा ताकि जवाबदेही स्थापित हो सके। इससे आम जनता में कानून-व्यवस्था एवं अपराधियों के प्रति कठोरता का संदेश प्रभावी तरीके से प्रस्तुत हो सकता है।