ये तस्वीर किसी श्मशान घाट की नहीं बल्क़ि एक गरीब परिवार के उस आशियाने की हैं. जो उत्तर प्रदेश प्रशासन की हैवानियत का शिकार हो गया. इस राख़ में ना सिर्फ घर की यादें बल्क़ि परिवार से माँ-बेटी का हमेशा-हमेशा के लिए साथ भी छूट गया क्योंकि कानपुर देहात प्रशासन के बुलडोज़र ने गरीब के आशियाने को ढ़हाया तो उससे उठी आग़ ने माँ-बेटी को जिंदा जला दिया.

कानपुर देहात स्थित मड़ौली गांव से सामने आई इस घटना ने ना सिर्फ ग्रामीण बल्क़ि हर उस नागरिक के रोंगटे खड़ें कर दिए जो आज भी सरकार सिस्टम से उम्मीद लगाये बैठा हैं. दरअसल, अवैध कब्जा मुक्त कराने गए कानपुर देहात प्रशासन पर आरोप है कि उसने अवैध भूमि पर कब्जा कर झोपड़ी बनाकर रह रहे एक परिवार के ना सिर्फ आशियाने को बुलडोज़र से ढहा दिया बल्क़ि उस समय अंदर मौजूद मां-बेटी को भी जिंदा जला दिया. 

अवैध कब्जा से लेकर प्रशासन की हैवानियत तक-

फ़िलहाल घटना की उच्च स्तरीय जांच शुरू हो गई हैं लेकिन अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, सोमवार (13 फरवरी) शाम कानपुर देहात प्रशासन बुलडोज़र और भारी पुलिस बल के साथ मैथा तहसील के मड़ौली गांव अवैध तरीके से सरकारी भूमि पर बनी झोपड़ी को हटाने पहुंचा.

उन्हें देख एक महिला चिल्लाते हुए झोपड़ी के अंदर घुसते ही दरवाजा बंद कर लेती है. फिर पुलिस वहां पहुंचकर दरवाजा तोड़ देती है. इसी दौरान, झोपड़ी में अचानक आग लग जाती है. झोपड़ी के अंदर माँ-बेटी मौजूद थीं. दोनों को चिल्लाता देख बचाने के लिए पति कृष्ण गोपाल आगे आये तो वह भी बुरी तरह झुलस गए. 

लपटे जैसे ही तेज हुई तो प्रशासन ने आग़ बुझाने के लिए बुलडोज़ से झोपड़ी को ढहा दिया लेकिन तब तक पुलिस बल और अफसरों के सामने ही दोनों की जिंदा जलकर मौत हो गई. इसके बाद सभी ग्रामीणों का गुस्सा फुट पड़ा और उन्होंने प्रशासन को दौड़ा दिया.

परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता देख शिकायत के आधार पर SDM मैथा ज्ञानेंश्वर प्रसाद, रुरा SHO दिनेश गौतम, लेखपाल अशोक सिंह समेत 40 लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया. देर रात ही मामले की गंभीरता को देखते हुए कानपुर कमिश्नर राज शेखर, डीएम नेहा जैन, ADG आलोक कुमार समेत कई अफसर मौके पर पहुंचे. इस दौरान राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला भी घटनास्थल पर पहुंची. उन्होंने चर्चा की फिर भी नाराज परिजनों ने घटना पर संज्ञान नहीं लिए जाने तक मां और बेटी का शव नहीं उठाने दिया.

पिता-बेटे और ग्रामीणों ने लगाए कई गंभीर आरोप-

मां प्रमिला दीक्षित (उम्र 41) और बेटी नेहा (उम्र 21) की मौत के बाद प्रशासन की इस पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए पति कृष्ण गोपाल दीक्षित ने कहा कि कुछ ग्रामीणों के साथ मिलकर एसडीएम और तहसीलदार बुलडोजर लेकर आए थे. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आग लगा दो.. तो किसी ने आग़ लगा दी. मैं और बेटा तो किसी तरह झोपड़ी से बाहर निकल गए, लेकिन मां-बेटी अंदर रह गई और उनकी मौत हो गई. इस दौरान प्रशासन उन्हें जलता हुआ छोड़कर भाग गया.

तो वहीं बेटे शिवम ने नम आंखों से बताया कि एसडीएम, एसओ, लेखपाल सभी ने मिलकर मेरे घर में आग लगा दी. मैं और पिता तो बाहर निकला गए लेकिन मां और बहन को जिंदा जला दिया. झोपड़ी के बाहर बने मंदिर व नल को भी बुलडोज़र से तोड़ दिया. अधिकारियों ने साजिश के चलते घर में आग लगाकर सब कुछ राख कर दिया. 

शिवम ने आगे यह भी बताया कि गांव के ही एक शख्स के द्वारा अवैध कब्जा करने की शिकायत कराये जाने के बाद हम लोग डीएम के पास भी गए थे लेकिन फिर भी प्रशासन ने कुछ नहीं किया. तो वहीं ग्रामीणों का कहना है कि गांव में गौरव दीक्षित नाम का एक दबंग है. उसी ने 10 दिन पहले प्रशासन, लेखपाल और एसओ के साथ मिलकर पूरी साजिश रची थी. इसमें गांव के ही कुछ लोग भी मिले हुए हैं. इतनी बड़ी घटना के बाद भी डीएम अपने कर्मचारियों को बचा रहे हैं. इस पूरे मामले में सिर्फ और सिर्फ प्रशासन ही दोषी है क्योंकि इसके लिए अफसरों ने अच्छा पैसा खाया है. वह जबरदस्ती अतिक्रमण हटाने पर अड़े हुए थे. कुछ दिन पहले ही इनके पक्के मकान को भी गिरा दिया था. तभी से ये लोग झोपड़ी में रह रहें थे.

प्रशासन ने दी सफाई, जांच शुरू-

इस पूरे घटनाक्रम पर डीएम नेहा जैन ने सफाई देते हुए बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची तो महिलाएं सामने आईं और रोकने का प्रयास किया. मां-बेटी ने टीम पर हमला करते हुए घर के अंदर जाकर आग लगा ली. दोनों को बचाते समय एसओ रूरा का हाथ भी जल गया. मामले की गंभीरता को देख जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है. अगर किसी अफसर की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. 

परिजनों की मांग-

परिजनों का प्रशासन के खिलाफ गुस्सा सातवें आसमान पर हैं तो वहीं पारिवारिक लोगों ने सरकार से मांग की है कि दोषियों को फांसी दी जाए. साथ ही पांच बीघा जमीन और पांच करोड़ रुपए के साथ ही बेटे को सरकारी नौकरी भी दी जाए. इस हादसे के बाद घर में अब सिर्फ बेटा, बहू और पिता बचे हैं. पहले घर और अब झोपड़ी गिराए जाने के बाद से ही सभी लोग रोड़ पर आ गए हैं.

विपक्ष का योगी सरकार पर वार-

रोंगटे खड़े कर देने वाली इस घटना के बाद से ही विपक्ष योगी सरकार को घेरता हुआ दिखाई दे रहा हैं. फ़िलहाल सियासत तो गर्म है ही लेकिन योगी के बुलडोज़र राज ने न सिर्फ़ ग़रीब के आशियाने बल्क़ि पूरे परिवार की खुशियों को ही जलाकर राख़ कर दिया.