भोपाल. फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की लगातार दो रिपोर्ट ने कलई खोली है कि प्रदेश में अति सघन वन आवरण क्षेत्र काम हो रहा है. विरल (ओपन फारेस्ट) वन क्षेत्र का दायरा बढ़ रहा है. फॉरेस्ट डेंसिटी को बढ़ाने के लिए वर्ष 2018 से ग्रीन इंडिया मिशन शुरू किया गया है. करोड़ों खर्च होने के बाद भी रिजल्ट अपेक्षा से कम है. विभाग के ही सीनियर अधिकारी ने एक पत्र लिखकर ग्रीन इंडिया मिशन के साइट सिलेक्शन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अधिकारी ने यह पत्र वातानुकूलित कक्ष में बैठकर नहीं लिखे हैं. बल्कि उन्होंने फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लेने के बाद या पत्र लिखा है. यह पत्र ग्रीन इंडिया मिशन के प्रमुख एवं एपीसीसीएफ रमन कुमार श्रीवास्तव को लिखा है. ग्रीन इंडिया मिशन की पोल खोलने वाले पत्र में लिखा गया है कि मिशन के तहत जिस क्षेत्र का चयन किया गया है वहां का वन आवरण का घनत्व 0.5 से अधिक है. यही नहीं, यह सघन वन एवं साबुन तथा मिश्रित प्रजातियों आच्छादित स्थल गुणवत्ता तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी-अ के वनों से आच्छादित वन है. चयन स्थल पर सवाल उठाते हुए अफसर ने पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि वृक्षारोपण क्षेत्र का चयन वर्किंग प्लान के प्रावधानों के विपरीत किया गया है.
*मिशन का बजट भी नियम विरुद्ध किया खर्च*
ग्रीन इंडिया मिशन की पोल खोलने वाले एपीसीसीएफ ने यह पत्र 18 जनवरी को उत्तर वन मंडल बैतूल के भौरा रेंज क्रमांक-130 के दौरे के बाद लिखा है. दौरे पर गए अधिकारी ने लिखा है कि क्षेत्र में ग्रीन इंडिया मिशन के तहत वर्ष 2020 में 125 हेक्टर इंडिया का चयन किया गया है. इसमें 11000 पौधों का रोपण किया गया है, जो जीवित है किंतु उनकी गुणवत्ता अत्यंत खराब है. पत्र में आगे लिखा गया है कि क्षेत्र का चयन वृक्षारोपण हेतु नहीं किया जाना चाहिए था. अधिकारी ने लिखा है कि मिशन के बजट की राशि का दुरुपयोग किया गया है.
*पूरे प्रदेश में भी यही स्थिति है*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रीन इंडिया मिशन के द्वारा चयनित क्षेत्र में गड़बड़ी अकेले उत्तर बन मंडल बैतूल में ही नहीं पाई गई है, बल्कि रायसेन, सागर सहित एक दर्जन वनमंडलों में भी यही स्थिति है. एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 0.5 घनत्व वाले वन क्षेत्र को चयन करने के पीछे मंशा यही रही है कि असफल वृक्षारोपण की पोल खुलने पर पर्दा डालना. केंद्र सरकार ने ग्रीन इंडिया मिशन बिगड़े वन क्षेत्र को सुधारने के उद्देश्य से शुरू किया है. मिशन के अधिकारी अपनी सुख-सुविधा पर राशि ज्यादा खर्च कर रहे हैं. अति घनत्व वन क्षेत्र के जंगल की फोटो ड्रोन से विभाग की वेबसाइट पर पोस्ट कर वाहवाही ले रहे हैं.
*इनका कहना..*
मैं मामले को देखता हूं. प्रथम दृष्टया तो मॉडरेट फॉरेस्ट को भी मिशन में लिया गया है. यदि चयन को लेकर कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसका दिखावाता हूं.
*आरके गुप्ता, वन बल प्रमुख*
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ग्रीन इंडिया मिशन के साइट सिलेक्शन को लेकर उठे सवाल
बिगड़े बन को सुधारने की बजाए सघन वन किए वृक्षारोपण