कांग्रेस की साढ़े तीन हजार किमी की भारत जोड़ो पदयात्रा इस समय सियासी चर्चाओं में है। इसकी वजह यह भी है क्योंकि इस यात्रा के लिये राहुल गांधी और उनके कुछ खास सलाहकर ऐसे लोगों को जोड़  रहे हैं,जो किसी वक्त सत्ता परिवर्तन के बड़े कारक बने हैं। राहुल ने दो दिन पहले ही कहा है कोई साथ आए या न आए,मैं अकेला भी चल सकता हूं। उनका यह कथन राजनीतिक दलों के लिये भी आगामी लोकसभा चुनाव से पहले का संकेत माना जा रहा है। यह साफ इशारा है कि कांग्रेस किस दिशा में और कैसे आगे बढ़ेगी। यह वह वक्त भी है, जब विपक्ष की ओर से कई नेता पीएम पद के लिए उम्मीदवार के तौर पर दावेदारी कर रहे हैं।

खास बात यह है कि इन दिनों राहुल जिन लोगों से मिल रहे हैं, वे जरा अलग किस्म के हैं। उन्होंने हाल में सिविल सोसाइटी के नुमाइंदों से लंबी चर्चा की है। यह वही सिविल सोसाइटी है जिसने कुछ साल पहले भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया था। तब अन्ना हजारे की अगुवाई में एक मुहिम चली और उस आंदोलन से आम आदमी पार्टी निकली, हालांकि इससे तब कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ था। दिल्ली राज्य की सत्ता गई थी और केंद्र की यूपीए सरकार भी मुश्किल में पड़ गई थी। अब राहुल के नये दोस्त वहीं हैं। इनमें एक है- योगेंद्र यादव। जिनकी राहुल से लंबी बात हुई। यादव समेत सिविल सोसाइटी संगठनों के 150 नुमाइंदे राहुल गांधी के साथ बैठक में शामिल हुए। इनमें सैयदा हमीद, पीवी राजगोपाल, सफाई कर्मचारी आंदोलन के बेजवाड़ा विल्सन भी थे।

7 सितंबर से शुरू होगी भारत जोड़ो यात्रा

कांग्रेस भारत जोड़ो यात्रा 2 अक्टूबर की बजाय अब 7 सितंबर से शुरू होगी। राहुल 1991 में हुई अपने पिता राजीव गांधी की हत्या के स्थान श्रीपेरंबदूर स्मारक पर श्रद्धांजलि के बाद कन्याकुमारी में यात्रा की शुरुआत करेंगे। वे यात्रा में लोगों को बताएंगे कि कैसे एक तरफ आरएसएस की विचारधारा है और दूसरी तरफ हम लोगों की सबको साथ लेकर चलने की विचारधारा है। यात्रा कार्यक्रम के प्रभारी दिग्विजय सिंह हैं। डेढ़ सौ दिन की पदयात्रा 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होकर निकलेगी।

नए दोस्तों के कामकाज का विस्तृत है दायरा

यादव का राजनीति से गहरा नाता है और उनका विश्लेषण सटीक होता है। बेजवाड़ा विल्सन कर्नाटक के कोलार के हैं और भारत में सिर पर मैला ढोने का काम खत्म कराने के लिए आंदोलन के तहत तीन लाख लोगों को इससे मुक्ति दिला चुके हैं, उन्हें रेमन मैग्सेसे अवार्ड भी मिला है। सैयदा हमीद योजना आयोग की पूर्व सदस्य और महिला अधिकारों की जबर्दस्त पैरोकार हैं। राजगोपाल एकता परिषद के संस्थापक  हैं तथा भूमि सुधार व किसानों के मुद्दों को उठाते रहते हैं।