महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी अपने एक विवादित बयान के चलते मुश्किल में फंस गए हैं। उनके इस बयान की जमकर निंदा हो रही है। तो वहीं शिवसेना, कांग्रेस, एनसीपी, एकनाथ शिंदे समूह के लोग राज्यपाल पर निशाना साध रहे हैं। अब इस लिस्ट में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे भी शामिल हो गए हैं। राज ठाकरे ने ट्वीट करते हुए लिखा कि मराठी लोगों को भड़काओ मत..! उन्होंने आगे लिखा है कि अगर आप इतिहास नहीं जानते हैं तो इसपर मत बोलिए।

राज ठाकरे ने राज्यपाल पर साधा निशाना-

राज ठाकरे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि आप महाराष्ट्र के इतिहास के बारे में नहीं जानते हैं तो बात न करें। राज्यपाल एक प्रतिष्ठा और सम्मान का पद है इसलिए लोग आपके खिलाफ बोलने से हिचकिचाते हैं, लेकिन आपके बयानों ने महाराष्ट्र के लोगों की भावनाओं को आहत किया है। महाराष्ट्र में दूसरे राज्यों से लोग व्यापार करने क्यों आ रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि मराठी आदमी ने यहां मन और जमीन की खेती की? और कहीं क्या उन्हें ऐसा माहौल मिलेगा? उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए बात करके माहौल खराब न करें कि चुनाव से पहले किसी ने कुछ कहा था। आपने यह बयान क्यों दिया, हम इतने भोले नहीं हैं कि यह न जान सकें। मराठी आदमी को मत भूलना, मैं अभी आपको बस इतना ही कह रहा हूं।

राज्यपाल का बड़ा बयान?

दरअसल राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एक कार्यक्रम में कहा कि मैं लोगों से कह रहा हूं कि अगर आप गुजरातियों और राजस्थानियों को महाराष्ट्र से, खासकर मुंबई और ठाणे से बहार निकाल देंगे, तो आपके पास एक पैसा भी नहीं बचेगा। यदि मुंबई को आर्थिक राजधानी कहा जाता है, तो फ़िर यह आर्थिक राजधानी नहीं बन सकती है।

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राज्यपाल ने दी सफाई-

बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के निर्माण में मराठी लोगों की मेहनत का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की शान है। यह देश की आर्थिक राजधानी भी है। मुझे गर्व है कि मुझे इस धरती पर छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठी लोगों की राज्यपाल के रूप में सेवा करने का अवसर मिला।

इस वजह से मैंने भी बहुत कम समय में मराठी भाषा सीखने की कोशिश की है। कल राजस्थानी समाज के कार्यक्रम में मैंने जो बयान दिया, उससे मेरा मराठी आदमी को नीचा दिखाने का कोई इरादा नहीं था। मैंने केवल गुजराती और राजस्थानी मंडलों द्वारा पेशे में किए गए योगदान पर बात की थी।