भोपाल। प्रदेश के कॉलेजों में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए अब रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल गठित की जाएगी। नई शिक्षा नीति के तहत कॉलेजों को इस सेल का गठन करना होगा। इसको कोलेजों ने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है। यूजीसी ने भी इस संबंध में कॉलेजों के प्रिंसिपल को निर्देश जारी किए हैं, जिसमें इसका स्ट्रक्कर भी शामिल है।

दरअसल, वर्तमान में रिसर्च का मुख्य काम यूनिवर्सिटी में होता है, लेकिन अब कॉलेजों को भी इसके लिए तैयार किया जाएगा। इस रिसर्च वर्क के तहत कॉलेजों को ऐसी फंडिंग एजेंसी के साथ संपर्क करना होगा जो रिसर्च वर्क को प्रमोट करती हैं। इसमें कॉलेज अपने क्षेत्र की इंडस्ट्री से भी लिंकेज कर सकेंगे। भोपाल में नूतन कॉलेज रिसर्च सेंटर भी है।

मानसिक तनाव से बचाने शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग

कोरोना संक्रमण काल के बाद मोबाइल, लेपटॉप और ऑनलाइन पढ़ाई के प्रति बच्चों का रूझान बढ़ा है। इस व्यवस्था से जहां एक ओर बच्चों की पढ़ाई जारी रही है, तो वहीं अब इसके नकारात्म परिणाम जैसे बच्चों में मोबाइल, गेमिंग, साइबर क्राइम, मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में अब प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को बच्चों को इस समस्या से निकालने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।

दरअसल, मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा हाल ही में बच्चों को वीडियो गेम की लत से बाहर निकालने, साइबर क्राइम और मानसिक तनाव से बचाने के लिए विभिन्न विषय विशेषज्ञों के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के बीईओ, संकुल प्रचार्यों को मास्टर प्रशिक्षण दिया गया है। अब यह मास्टर ट्रेनर स्कूलों के टीचर को प्रशिक्षण देंगे। बता दें कि इसके लिए आयोग द्वारा गोविंदपुरा करियर लॉ कॉलेज के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया था जिसमें प्रदेश के 550 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए थे।