रुपया एक बार फिर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 82.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर के मुकाबले रुपये में रकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार यानि आज भी रुपया नए निचले स्तर पर पहुंच गया है। मुद्रा बाजार में भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 82.21 के करीब पहुंच गई।
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। आज भी रुपया नए निचले स्तर पर पहुंच गया है। मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 82.21 पर आ गया है। रुपया 33 पैसे गिरकर 82.21 के ताजा सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया है।
इससे पहले 23 सितंबर 2022 को डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार रु. 81 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले यह 20 जुलाई को 80 रुपये के स्तर को पार कर गया था।
रुपये में कमजोरी का सिलसिला लगातार जारी है। शुक्रवार को रुपया 82 रुपये के सर्वकालिक निचले स्तर को पार कर गया। डॉलर के मुकाबले रुपया फिलहाल 33 पैसे की गिरावट के साथ 80.21 पर ट्रेंड कर रहा है। इससे रुपया पिछले सत्र में 81.88 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। 23 सितंबर 2022 को डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 81 के आंकडे को पार कर गया। इससे पहले यह 20 जुलाई को 80 रुपये के स्तर को पार कर गया था। बाजार के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक डॉलर इंडेक्स में मजबूती से अन्य मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है।
अमेरिका में आज सितंबर महीने के नौकरी के आंकड़े जारी होने जा रहे हैं. इससे पहले वहां के निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। इस बीच डॉलर इंडेक्स एक फीसदी बढ़कर 112.26 पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स इस साल अब तक 17 फीसदी चढ़ा है।
अनिश्चित वैश्विक बाजार माहौल, मजबूत डॉलर और फेड के ब्याज दरों में बढ़ोतरी के फैसले के बीच रुपया इस साल अब तक 10.6 फीसदी कमजोर हुआ है। शिकागो फेड के अध्यक्ष चार्ल्स इवांस ने गुरुवार को कहा कि फेड की नीति दर 2023 के वसंत तक 4.5% -4.75% तक बढ़ने की संभावना है क्योंकि फेड बहुत अधिक मुद्रास्फीति को नीचे लाने के लिए उधार लेने की लागत बढ़ाता है। उसी समय, मिनियापोलिस फेड के अध्यक्ष नील काशकारी ने संकेत दिया कि फेड तब तक ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा जब तक कि वित्तीय स्थिति यहां से खराब न हो जाए।
डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट का अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। इससे अर्थव्यवस्था का चालू खाता घाटा (सीएडी) भी प्रभावित होगा। महंगे आयात के कारण, विदेशों से खरीदे गए और देश में आयात किए गए सामानों की कीमतों में वृद्धि होगी। इसका असर भविष्य में स्थानीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ेगा। हालांकि, कमजोर होता रुपया देश के निर्यातकों के लिए अच्छी बात साबित हो सकता है, क्योंकि उन्हें अपने उत्पादों के लिए मिलने वाले डॉलर को बदलने से ज्यादा रुपये मिलेंगे।