भोपाल. लघु वनोपज संघ सरकार के प्रति आदिवासियों का हृदय परिवर्तन करने के लिए लिए पेसा एक्ट के साथ-साथ 200 करोड़ रूपया बोनस वितरण और 15 लाख आदिवासी परिवारों को जूता -चप्पल, साड़ी, छाता वितरण करने जा रहा है. इस आशय की पुष्टि लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक पुष्कर सिंह ने की है. तेंदूपत्ता संग्राहको को बोनस वितरण की शुरुआत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूर्वी निमाड़ के खंडवा क्षेत्र से कर चुके हैं. संघ बोनस वितरण की कड़ी में अगला कार्यक्रम महाकौशल के आदिवासियों के लिए सिवनी में और विंध्य क्षेत्र के आदिवासियों के लिए सतना में आयोजित करने जा रहा है. 

दोनों ही कार्यक्रम में 100 -100 करोड़ रुपए का बोनस वितरण किया जाएगा. इसके अलावा संघ 260 ग्राम सभाओं में तेंदूपत्ता संग्रहण का अधिकार आदिवासियों को सौंपने जा रहा है. यह प्रयोगिक तौर पर लागू किया जा रहा है. यह प्रयोग सफल होने पर 5080 आदिवासी बाहुल्य ग्राम सभाओं को तेंदूपत्ता संग्रहण का अधिकार दे दिया जाएगा. 

इसके पहले लघु वनोपज संघ राजधानी भोपाल में दो बड़े आयोजन जंबूरी मैदान में तेंदूपत्ता संग्राहक सम्मेलन और लाल परेड पर अंतरराष्ट्रीय वन मेले का कराकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वन मंत्री विजय शाह को फील गुड का एहसास करा चुका है.

 'मिशन-23 के लिए विभाग के मुखिया से अपेक्षाएं

 वन मंत्री विजय शाह ने "मिशन-2023' के लिए विभाग के मुखिया से कई अपेक्षाएं की है. विजय शाह ने मंगलवार को नए साल पर एसीएस फॉरेस्ट जेएन कंसोटिया सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों को अपने बंगले पर औपचारिक मुलाकात के लिए आमंत्रित किया था. बंगले पर पहुंचे सभी अधिकारियों को नए साल की बधाई देते हुए वन मंत्री विजय शाह ने लघु वनोपज संघ के आयोजनों की तारीफ करते हुए पीसीसीएफ हॉफ से अपेक्षा की कि ऐसे ही कुछ और आयोजन और अभिनव प्रयोग विभाग की ओर से भी आयोजित होने चाहिए. विजय शाह का इशारा इमेज बिल्ट अप करने की ओर था.

सत्ता की चाबी आदिवासियों के हाथ में

मध्य प्रदेश सत्ता की चाबी आदिवासी वोट बैंक के पास निहित है. प्रदेश में आदिवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीट सहित 103 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पर हार-जीत का फैसला आदिवासी वोटर करते आ रहे हैं. यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वन मंत्री विजय शाह में सत्ता में बने रहने के लिए पिछले चुनाव में बिखर गए  आदिवासियों के वोट कबाड़ने हर जतन कर रहें है. 2013 के इलेक्शन में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में से बीजेपी ने जीती 31 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 15 सीटें 2018 के इलेक्शन में आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीटों में से बीजेपी केवल 16 सीटें जीत सकीं. कांग्रेस ने दोगुनी यानी 30 सीटें जीत लीं, जबकि एक निर्दलीय के खाते में गई. लेकिन, 2021 के उपचुनाव में वापस जोबट सीट बीजेपी के खाते में गई, जिससे बीजेपी के पास 17 सीटें हो गई और कांग्रेस के पास 29 सीटे है.