Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्म भूमि के पास भारतीय रेलवे की ज़मीन से हटाए जा रहे अतिक्रमण पर 10 दिन की रोक लगा दी है. अतिक्रमण पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने रेलवे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. फ़िलहाल, इस मामले पर अगली सुनवाई 1 हफ्ते बाद होगी.

जस्टिस अनिरुद्ध बोस, संजय कुमार और एसवीएन भट्टी की बेंच के सामने आज सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांतो सेन पेश हुए. उन्होंने कहा, अब सिर्फ 70 के करीब मकान ही ध्वस्त होने से बचे हुए हैं. अगर इस पर तुरंत रोक नहीं लगी तो सुनवाई निरर्थक हो जाएगी.

जजों ने कुछ समय तक विचार करने के बाद मामले में 10 दिन तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया. यानी, इस फैसले के बाद रेलवे 10 दिनों तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं कर पायेगा.

कोर्ट ने रेलवे को 7 दिन का समय याचिका पर जवाब देने के लिए दिया है. अगले सप्ताह मामले पर सुनवाई होगी. आज सुनवाई की जानकारी नहीं मिलने के कारण रेलवे की तरफ से कोर्ट में कोई मौजूद नहीं था.

याचिकाकर्ता ने कहीं ये बड़ी बात-

याचिकाकर्ता का नाम याकूब शाह हैं, जो मथुरा की नई बस्ती में रहता है. उन्होंने दावा किया कि 100 साल से भी अधिक समय से लोग उस जगह पर बसे हैं. अतिक्रमण अभियान के खिलाफ उनकी याचिका निचली अदालत और इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है. इसके बावजूद भी रेलवे ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी.

क्या है पूरा मामला-

मथुरा से वृंदावन को जोड़ने वाली रेलवे लाइन पर पिछले कई सालों से रेल सेवा बंद है. जिसके कारण दोनों तरफ लोगों ने पक्के मकान बना लिए हैं. लेकिन, अब इस लाइन को रेलवे ब्रॉड गेज करने जा रही है.

जिसके लिए रेलवे ने वहां बसे लोगों को तीन बार जमीन ख़ाली करने का नोटिस भी दिया. हालांकि, इन नोटिसों के बाद भी कोई मकान ख़ाली करने को तैयार नहीं हुआ. जिसके बाद रेलवे ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी.