मध्यप्रदेश में शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग लगातार नवाचार कर रहा है। इसके साथ ही अब विभाग ने नियमों के विपरीत चलने वाले स्कूलों और लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त रूख अपनाया है। ऐसे में हाल ही में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने भूमि, भवन एवं मूलभूत सुविधाएं जैसे मापदंड पूरे नहीं करने पर 1,419 प्राइवेट स्कूलों की सत्र 2023- 2024 की मान्यता समाप्त कर दी है।

इसमें भोपाल जिले के करीब 141 निजी स्कूल शामिल हैं। लेकिन विभाग के इस निर्णय के बाद इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब चार लाख स्टूडेंट्स के भविष्य पर संकट आ गया है और वह परेशान हैं। हालांकि विभाग ने इन्हें राहत देते हुए इस साल तो इन स्कूलों से परीक्षा देने की सहूलियत दी है, लेकिन अगले सत्र से इन्हें दूसरे स्कूल में शिफ्ट होना होगा। बता दें कि डीपीआई ने जिन स्कूलों की मान्यता समाप्त की है, उनमें जाएगी। अधिकतर स्कूल 30 से 40 साल पुराने हैं। अधिकारियों के मुताबिक स्कूलों को हर साल मापदंड पूरे करने के लिए मोहलत दी जाती है, लेकिन स्कूल पूरा नहीं करते हैं। इन स्कूलों की मान्यता नए एक्ट के तहत रद्द की गई है

इसलिए हुई मान्यता समाप्त

अभी तक प्राइवेट स्कूलों के पास 12वीं की मान्यता के लिए 5600 वर्ग फीट और 10वीं की

मान्यता के लिए 4000 वर्ग फीट तक जमीन होना जरूरी था। इस बार स्कूल शिक्षा विभाग ने जमीन की अनिवार्यता में संशोधन करते हुए माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्कूलों की मान्यता नियम 2017 लागू कर दिया है। इसके तहत आगामी सत्र में उन्हीं प्राइवेट स्कूलों को मान्यता दी जाएगी, जो एक एकड़ जमीन पर बने होंगे। इससे कम जमीन होने पर मान्यता नहीं दी जाएगी |

निजी स्कूल कर रहे विरोध

विभाग के इस निर्णय का अब निजी स्कूल संचालकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि 13 जनवरी को मंत्रालय द्वारा आदेश जारी कर अशासकीय विद्यालयों को भूमि और भवन की शिथिलता दी गई थी, लेकिन संभागीय अधिकारियों ने स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी है।