इसके मास्टर अन्य मुल्कों से भारत पहुंचे और भोपाल को अपना ठिकाना बनाया| भोपाल में यह लगातार अपनी जिहादी क्लासेस लगा रहे थे| भोपाल के अलग-अलग इलाकों की मस्जिदों में एक विशेष समुदाय के युवाओं से मिलकर उन्हें अपने संगठन की विचारधारा से जोड़ रहे थे| यह जिहादी साहित्य भी मुहैया कराते थे| इनका काम करने का तरीका बेहद शातिराना था| इस्लामी शिविर में यह शांति और सद्भावना का ज्ञान तो नहीं दे रहे होंगे|

 निश्चित ही ये हमारे यहाँ के युवाओं को अपने ही देश के प्रति खड़ा करने की कोशिश कर रहे होंगे| यह तो चंद आतंकी चेहरे हैं जो पकड़ाए हैं| लेकिन इन चेहरों ने न जाने कितने युवाओं को इनफ्लुएंस में ले लिया होगा, जो स्लीपर सेल में बदल गये होंगे|  यह एक तरह प्रोग्रामर की तरह काम करते हैं, यह युवाओं को अपने साथ जोड़ कर, धीरे-धीरे उनके माइंड को अपने मुताबिक सेट कर देते हैं| उनके अंदर ऐसे सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर देते हैं जिससे उन्हें सिर्फ यही विचारधारा सत्य दिखाई देती है| अपने ही देश के खिलाफ युवा जहर से इतने भर जाते हैं कि फिर इन्हें अच्छे और बुरे का ख्याल नहीं रहता| एटीएस निश्चित ही बधाई की पात्र है जिसने ऐसे आतंकियों को पहचानने और पकड़ने में सफलता हासिल की|

 लेकिन यह एक्शन यहीं तक सीमित नहीं रहना चाहिए| इस संगठन जेएमबी के तार कहां तक फैले हुए हैं?  कैसे यह भारत में प्रवेश करके भोपाल तक पहुंचे| भोपाल को ही इन्होंने अपना अड्डा क्यों बनाया? भोपाल में अब तक कितने छात्रों को अपने साथ जोड़ चुके हैं? कितने छात्रों का ब्रेनवाश कर चुके हैं? कितने छात्रों, लोगों को पूर्णकालिक और अंशकालिक सदस्य बना चुके हैं? निश्चित ही इनका दायरा भोपाल के कई गली गली मोहल्ले तक पहुंच चुका है| बांग्लादेश स्थित मुख्यालय से आने वाले निर्देश क्या होते थे? आखिर यह आतंकवादी क्या करना चाहते थे? शीर्ष आतंकवादियों से इन्हें निर्देश भी मिलते थे, उनसे इनकी बात भी होती थी, बार-बार इन्हें क्या निर्देश मिलते थे?

 आखिर Bhopal जैसे शांतिप्रिय तहजीब और नफासत के शहर में, नफरत के बीज बोने की यह प्रक्रिया क्या सिर्फ साल दो साल पुरानी है या इसके तार इससे पहले के दौर  से भी जुड़े हुए हैं? निश्चित ही मध्य प्रदेश शांति का टापू रहा है|  “जमात ए मुजाहिद्दीन” जेएमबी के चार आतंकियों को गिरफ्तार करने से एक बात तो साफ है कि भोपाल अब आतंकवादियों की निगाह में है| इससे पहले सिमी ने भोपाल को अपना ठिकाना बनाया था| प्रतिबंधित संगठन इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया सिमी का जेएमबी से क्या कनेक्शन है? यह भी तलाश हो रही है|

भोपाल की केंद्रीय जेल में सिमी के आतंकवादियों में से कईयों को सजा भी हो चुकी है| निश्चित ही केंद्र सरकार की एजेंसियां भी मध्य प्रदेश पुलिस के संपर्क में है और आपस में जानकारी साझा कर रही हैं| यह छोटा मामला नहीं है यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है| आतंकियों के पास से जो पर्चे मिले हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि उनका मकसद मध्य प्रदेश और पूरे देश को आतंकी घटनाओं से दहलाना रहा है| 

 जेएमबी बांग्लादेश में भी कई स्थानों पर बम विस्फोट कर चुका है| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था चाक-चौबंद है| अपराधियों को छोड़ा नहीं जाएगा| मुख्यमंत्री ने अपने इरादे पहले भी बताए हैं| मध्यप्रदेश में डाकुओं का खात्मा हो चुका है लेकिन आतंकवादियों की किसी भी गतिविधि को एक दो साल तक होते रहने देना निश्चित ही खुफिया एजेंसियों में व्याप्त लापरवाही के संकेत देती है| मध्य प्रदेश की एटीएस को और केंद्रीय एजेंसियों और सजग होना होगा।