भोपाल: विधानसभा में दस्यु अधिनियम 1982 समाप्त करने 10 अगस्त 21 को प्रस्ताव पारित हुआ। 2 सितंबर को राज्यपाल के पास भेजा गया। 3 सितंबर 21 को राज्यपाल ने हस्ताक्षर किए और फिर 30 सितंबर को गजट नोटिफिकेशन भी हो गया। दिलचस्प पहलू यह है कि 17 महीने का समय बीत गया इस अधिनियम को समाप्त करने की जानकारी न तो गृह मंत्रालय को थी और न ही पुलिस महानिदेशक भोपाल जानते थे।
उन्हें इसकी जानकारी तब लगी, जब नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र लहार में एक व्यक्ति पर इस अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज करने की आपत्ति की है। उलटे डॉ. सिंह ने एक्ट के समाप्त होने का गजट नोटिफिकेशन की प्रति भी भेजी।
विधानसभा मे नेता प्रतिपक्ष डाॅ. सिंह ने सरकार व सदन की कार्यवाही पर चिन्ह खड़ा करते हुये कहा है कि दस्यु अधिनियम 1982 म.प्र. विधानसभा में निरसन/समाप्त होने के बाद भी इसका दुरूपयोग किया जा रहा है। आज भी ग्वालियर-चंबल संभाग में इस अधिनियम की धाराओं का खुले-आम दुरूपयोग हो रहा है और पुलिस के रोजनामचे इन धाराओं से रंगे पड़े हैं।
उन्हें यह भी नहीं पता कि जो अधिनियम समाप्त ही हो चुका है, उसकी धाराये क्यों लगाई जा रही है? साथ ही गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा जो कि संसदीय कार्यमंत्री भी है, उनकी कार्य शैली पर भी चिन्ह खड़ा होता है कि जो अधिनियम विधानसभा से पारित होकर 30 सितम्बर 2021 को निरसन हो चुका है, लेकिन उक्त अधिनियम के समाप्त होने के बाद भी ग्वालियर-चंबल संभाग के पुलिस थानों में धड़ल्ले से उक्त अधिनियम के तहत मामूली घटनाओं पर दस्यु अधिनियम की धारायें लगातार लगाई जा कर निर्दोषो पर अत्याचार किया जा रहा है।
इमेज की ब्रांडिंग हुई पर कानून समाप्त होने का विचार नहीं हुआ-
नेता प्रतिपक्ष ने आष्यर्च व्यक्त किया है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री अपनी ब्रांडिंग के लिए प्रचार-प्रसार में अग्रणीय बने रहते है। गृह मंत्री अपने ही कानून का पालन कराने में असक्षम साबित हुये है। यह उनकी कार्यशैली को दर्शाता है कि वे कितने जागरूक है एवं दस्यु अधिनियम जो कि विधानसभा से पारित होकर दिनांक 30 सितम्बर, 2021 को निरसन किये जाने के बाबजूद भी इसका कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है।
उन्होंने मांग की है कि इस अधिनियम के समाप्त हो जाने के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग में दस्यु अधिनियम के तहत जितने भी प्रकरण पंजीबद्ध किये गये है उनकी जांच कराकर इन प्रकरणों को समाप्त कर पीड़ितों को मुआवजा दिलाया जाए।