रोज 80 टन जैविक खाद..!
राजधानी में अब इंदौर की तर्ज पर म्युनिसिपल वेस्ट से बायो सीएनजी प्लांट आकार लेने वाला है। हालांकि इंदौर का प्लांट 550 मीट्रिक टन क्षमता का है, जबकि भोपाल का 400 मीट्रिक टन का होगा। म्युनिसिपल वेस्ट से बायो सीएनजी बनाने के मामले में अभी इंदौर देश में पहले नंबर पर है मगर भोपाल भी दूसरे नंबर पर होगा। इसका आज शाम मुख्यमंत्री शुभारंभ करेंगे।
इंदौर और भोपाल की तकनीक और निर्माण एजेंसी दोनों एक ही हैं। भोपाल का प्लाट एक साल के भीतर तैयार हो जाएगा। आदमपुर छावनी में दस एकड़ जमीन पर प्लांट निर्माण के लिए जमीन समतलीकरण आदि काम शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज प्लांट निर्माण के लिए भूमिपूजन कर रहे हैं। सीएम जमुनिया छोर में तैयार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का भी लोकार्पण करेंगे।
उल्लेखनीय है कि आम तौर पर एग्रीकल्चर वेस्ट और गोबर का उपयोग बायो सीएनजी बनाने में होता है। बताया जाता है कि इस मामले में योजना को थोड़ा बदला भी गया है क्योंकि पहले भोपाल में 200 200 मीट्रिक टन क्षमता के दो प्लांट लगने थे। इनमें से एक प्लांट के लिए यूनाइटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन 10 करोड़ सब्सिडी दे रहा था, लेकिन जिस कंपनी से निगम ने एग्रीमेंट किया था, उसने प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए। इसके बाद निगम ने दूसरा प्लांट लगा रही कंपनी आईएलएफएस को 400 मीट्रिक टन क्षमता प्लांट लगाने को कहा है। आईएलएफएस यूनिकोड की सब्सिडी के बिना काम कर रहा है, इसलिए अब 10 करोड़ का उपयोग निगम सीएनजी कचरा वाहन खरीदने में करेगा। बायो सीएनजी बनाने के लिए एग्रीकल्चर वेस्ट व गोबर का उपयोग होता है। महाराष्ट्र, पंजाब व हरियाणा में भी ऐसे प्लांट हैं।
इस प्लांट का फायदा यह होगा कि किसानों को यहां से हर दिन 80 टन जैविक खाद मिलेगी। प्लांट की लागत 80 करोड़ है, लेकिन यह खर्च कंपनी उठाएगी। इस प्लांट से नगर निगम को हर साल 6.52 करोड़ रुपए की बचत होगी। उसे बायो सीएनजी प्लांट से हर साल 1.66 करोड़ रु. की रॉयल्टी मिलेगी। अभी निगम इस कचरे की प्रोसेसिंग पर 4.86 करोड़ खर्च करता है, यानी कुल मिलाकर 6.52 करोड़ का सीधा फायदा होगा। निगम को मार्केट से 5 रुपए कम पर बायो सीएनजी मिलेगी। इसका उपयोग बीसीएलएल की बसों और निगम की गाड़ियों में होगा।