भोपाल: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रदेश के 925 वन ग्रामों को राजस्व गांव बनाने की घोषणा करेंगे. विधानसभा चुनाव के पहले वन ग्राम राजस्व गांव में तब्दील करने की डगर आसान नहीं है. इसमें कई कानूनी पेंचदगियां भी हैं. मसलन, केंद्र सरकार ने ही 12 अप्रैल 18 को राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि वन ग्रामों को राजस्व गांव बनाने के पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत कर अनुमति लेनी होगी. वर्ष 2018 से लेकर अब तक प्रदेश के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे. विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सरकार फिर वन ग्रामों को राजस्व गांव बनाने के अभियान में जुट गई है.

925 वन ग्रामों को राजस्व गांव बनाने के  लिए 2,40,431 हेक्टेयर वन भूमि को डिनोटिफाई करना होगा. इसके लिए राज्य सरकार को इतनी ही राजस्व भूमि वन विभाग को ट्रांसफर करनी होगी. इसी मुद्दे पर वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच समन्वय नहीं बन पा रहा है. यही कारण है कि मामला 2018 से लंबित है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 925 वन ग्राम में 98 ग्राम ऐसे हैं, जहां एक भी आबादी नहीं है. वन विभाग के प्रशासकीय प्रतिवेदन (2018-19) मैं उल्लेखित जानकारी के अनुसार 310 वन ग्रामों की सिद्धांतिक स्वीकृति भारत सरकार ने अक्टूबर 2002 से जनवरी 2004 कर दी थी किंतु सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका( क्रमांक/337/1995 की आईए क्रमांक-2 ) दाखिल हुई.

इस याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2002 को 1 ग्राम भूमि को डिनोटिफाई करने पर रोक लगा दी. अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम 2006 की धारा-3 (1) (ज) में भी वन ग्रामों को परिवर्तन करने के अधिकार का उल्लेख है. लेकिन विधि विभाग ने 12 दिसंबर 16 को अपनी अभिमत दी कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अंतर्गत बिना भारत सरकार के पूर्व अनुमति के वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. अधिनियम में वर्णित प्रावधानों एवं सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देश का अनुपालन किया जाना उचित होगा.
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 जिले                     गांव की संख्या
 खंडवा-बुरहानपुर        102
 बैतूल                           92
 डिंडोरी                        86
 मंडला                         84
 बालाघाट                     70
 बड़वानी                      70
 खरगोन                      67
 सीहोर                        53
 होशंगाबाद                  52
 छिंदवाड़ा                    49
 हरदा                          42
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राजस्व और वन विभाग के बीच फंसा वन ग्रामों का विकास

आदिवासी बाहुल्य वन ग्रामों का विकास कार्य राजस्व और वन विभाग के बीच उलझा हुआ है. राजस्व विभाग का कहना है कि 925 वनग्रामों में से वनग्रामों के पटवारी मानचित्र व खसरा पंजी 1980-81 में किए गए बंदोबस्त के दौरान राजस्व विभाग द्वारा नहीं बनाए गए हैं. वहीं वन विभाग ने इस कार्य को करने में असमर्थता जताई है. वन ग्रामों के अभिलेखों का संधारण वन विभाग द्वारा किया जाता है, लेकिन वन विभाग का तर्क है कि, वनग्रामों के पटवारी मानचित्र व खसरा पंजी की जानकारी वन विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है.

वन विभाग ने मांगे राजस्व अधिकारी के अधिकार 

वन विभाग ने 9 जून 2017 को एक  पत्र लिखकर कहा था कि 925 वन ग्रामों के राजस्व ग्रामों की तरह ग्राम का नक्शा बी-1 आदि अभिलेख तैयार किया जाना एक व्यापक कार्य है. इसके लिए वन विभाग को पटवारियों की आवश्यकता होगी. वन विभाग के अंतर्गत पटवारी के पद स्वीकृत करनेे व वन विभाग के अधिकारियों को राजस्व अधिकारी के अधिकार देने की मांग की गई थी.

इनका कहना 

सरकार ने वन ग्रामों को राजस्व गांव में बदलने के लिए जनजाति विभाग को नोडल एजेंसी बनाया है. हमने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है. आगे की कार्रवाही लाइव वन विभाग को करना है.


 "धीरेंद्र भार्गव एपीसीसीएफ भू अभिलेख वन विभाग"