भोपाल. ग्वालियर सर्किल में पदस्थ एपीसीसीएफ शशि मलिक का स्थानांतरण पर मिले स्टे विभाग ने खारिज कर लिया है. पूरे विभाग के शीर्षस्ध अधिकारियों का एक वर्ग स्थानांतरण पर मिले स्टे खारिज कराने में जुट गया था, क्योंकि लघु वनोपज संघ में पदस्थ है एपीसीसीएफ विश्राम सागर शर्मा को उपकृत करना था. एपीसीसीएफ शर्मा अक्टूबर में रिटायर हो रहे हैं. विभाग के आला अफसर चाहते थे कि शर्मा सेवानिवृत्ति के 7 महीने तक  फील्ड का सुख भोग सके. इसके पहले भी विश्राम सागर शर्मा ग्वालियर में ढाई साल तक पदस्थ रह चुके है. शर्मा मूलत: भिंड के रहने वाले हैं. यह जिला ग्वालियर सर्किल के अंतर्गत आता है.

14 फरवरी को शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत ग्वालियर सर्किल में पदस्थ एपीसीसीएफ शशि मलिक तबादला प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय एचआरडी शाखा में कर दिया था. पदस्थापना के साल भर भी पूरे नहीं हुए थे, इसे आधार बनाते हुए मलिक ने 16 फरवरी में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) से शासन के आदेश पर स्टे ले लिया था. कैट ने अपने स्टे ऑर्डर में 15 मई को सुनवाई की तारीख तय की थी. मामला विश्राम सागर शर्मा को उपकृत करना था, इसलिए वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने स्थानांतरण पर मिले स्टे को खारिज कराने के लिए पूरी ताकत लगा दी. इसके लिए तेजतर्रार आईएफएस अफसर संजीव झा को ओआईसी ( ऑफीसर-इन-चार्ज ) नियुक्त किया गया था. शासन की तरफ से विभाग की मजबूती से पक्ष रखते हुए स्टे को खारिज कराने में कामयाब हुए. स्टे खारिज होने के बाद एपीसीसीएफ शशि मलिक अब भोपाल में अपनी ज्वाइनिंग देंगे. फील्ड का सुख भोगने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित एपीसीसीएफ विश्राम सागर शर्मा की मांगी मुराद पूरी होगी.

*पद के दुरुपयोग की आशंका*
वैसे तो अखिल भारतीय सेवा के अफसरों को उनके गृह जिले अथवा गृह जिले के पास पदस्थ करना अनुचित माना जाता है. एपीसीसीएफ विश्राम सागर शर्मा भिंड जिले के रहने वाले हैं. भिंड जिला ग्वालियर सर्किल के अंतर्गत आता है. यानि उनका कार्यक्षेत्र ग्वालियर तक सीमित ना होकर भिंड और मुरैना तक है.  उनका गृह गांव चंबल नदी के नजदीक है. चंबल नदी में रेत के अवैध उत्खनन का बड़ा कारोबार होता है. भिंड-मुरैना में रेप का अवैध कारोबार बड़े पैमाने पर होता आ रहा है. ऐसी स्थिति में शर्मा के ग्वालियर सर्किल में स्थापना किए जाने से आशंका को बल मिल रहा है कि कहीं वे अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध कारोबारियों को बढ़ावा न दे दें.

 *सवा दो सैलरी वाले पद पर काम करेंगे ढाई लाख के अफसर*
 कैडर के अनुसार ग्वालियर सर्किल का पद सीसीएफ के लिए आरक्षित किया गया है. सरकारी दस्तावेज में यह पद वन संरक्षक के लिए है. वन संरक्षक  का वेतन एक लाख 30 हजार से लेकर दो लाख 16 हजार का है. आप इसी पद पर ढाई लाख रुपए के सैलरी लेने वाले एपीसीसीएफ काम कर रहे हैं. काम की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं है और न ही ये अफसर कोई अनूठा काम कर रहे हैं. बड़ी तनखा लेने वाले सीनियर अफसर भी पुराने ढर्रे पर ही काम कर रहे हैं.
 *एसडीओ का वैकेट कराने में विभाग की कोई रुचि नहीं*
 छतरपुर वन मंडल के एसडीओ केबी गुप्ता का स्थानांतरण जुलाई 21 में किया गया था. तब से वह स्टेज पर ही काम कर रहा है. एसडीओ के स्टे को खारिज कराने के लिए विभाग के आला अफसरों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है. अब यही एसडीओ विभाग के लिए सिरदर्द बन गया है.