महाराष्ट्र में जारी सियासी संग्राम अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज चढ़ चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में, एकनाथ शिंदे ने कहा कि महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन सदन में अपना बहुमत खो चुका है क्योंकि शिवसेना विधायक दल के 38 सदस्यों ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है।

शिंदे गुट ने कोर्ट में दायर अपनी याचिका में उल्लेख किया है कि विधानसभा उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल तटस्थ नहीं हैं और वह कार्यवाही में पक्षपात करते हैं।

बता दें कि उद्धव ठाकरे खेमे के अनुरोध पर डिप्टी स्पीकर ने शिंदे समेत 16 बागी विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया है और उन्हें अयोग्यता का नोटिस भेजकर आज शाम तक जवाब देने को कहा है। इस फैसले के खिलाफ शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है।

महाराष्ट्र के उच्च शिक्षा मंत्री उदय सामंत शिंदे के गुट में शामिल हो गए है, उद्धव के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार में अब केवल तीन शिवसेना मंत्री बचे हैं। शिवसेना के करीब 8 मंत्रियों ने शिंदे का समर्थन किया है।

एमवीए सरकार के साथ नहीं जाएंगे: बागी विधायक

शिवसेना के बागी विधायक दीपक केसरकर ने कहा कि शिंदे खेमा महाराष्ट्र विधानसभा में शक्ति परीक्षण का सामना करने के लिए तैयार है, लेकिन शिवसेना के नेता के रूप में ही शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जब उनकी संख्या 51 हो जाएगी तो वह मुंबई लौटने का फैसला करेंगे।

केसरकर बोले, एक या दो विधायक और हमारे साथ आएंगे। उनके समर्थन और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों से हमारी संख्या 51 हो जाएगी। हम तीन-चार दिनों में निर्णय पर पहुंच जाएंगे और फिर हम सीधे महाराष्ट्र वापस जाएंगे। शिंदे खेमे के विधायक किसी भी समय विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहली मान्यता शिंदे गुट को दी जानी चाहिए। हम एमवीए सरकार के साथ नहीं जाएंगे।