भोपाल: प्रदेश में अब अल्ट्रा मेगा पर्यटन परियोजना के लिये निजी क्षेत्र के पास पांच साल का संचालन अनुभव जरुरी नहीं होगा और न ही उसे पिछले तीन सालों में 50 करोड़ रुपयों का न्यूनतम ग्रास टर्नओवर दिखाना अनिवार्य होगा। इसके लिये वर्तमान शिवराज सरकार ने तीन साल पहले तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट को पर्यटन विभाग/राजस्व विभाग के लैंड बैंक की शासकीय भूमि आवंटन के संबंध में 31 अक्टूबर 2019 को किये उक्त प्रावधान को खत्म कर दिया है। इससे अब निजी क्षेत्र को बड़ी पर्यटन परियोजनाओं के लिये इस बंधन का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि राज्य की पर्यटन नीति के तहत अल्ट्रा मेगा परियोजना के लिये निवेशक को शासकीय भूमि 90 वर्ष की लीज पर 1 प्रतिशत वार्षिक रेंट पर आवंटित किये जाने तथा प्रत्येक तीस वर्ष उपरान्त लीज रेंट में 6 गुना वृध्दि किये जाने का प्रावधान है। ऐसे प्रोजेक्ट सौ करोड़ रुपये से अधिक के होते हैं। पिछली कमलनाथ सरकार में रायसेन जिले के सांची में ग्राम निनौद में अंतराष्ट्रीय गोल्फ कोर्स खोलने के लिये अमेरिका की एक कंपनी को भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया था परन्तु बाद में इस कंपनी ने अपने हाथ खींच लिये। इसीलिये अब पांच साल के अनुभव एवं न्यूनतम 50 करोड़ रुपये के टर्न ओवर के प्रावधान खत्म किया गया है जिससे नये निवेशक अल्ट्रा मेगा पर्यटन प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिये आगे आयें।