दुनिया के सताए लोग यहां सीने से लगाए जाते है, भगवान शिव सभी की मनोकामनाएं दूर करते है। जब भी आप भगवान के पास जाऊ तो अपना दिल लेकर। भगवान का वास भक्त के हृदय में होता है। परमात्मा अविनाशी है जिनका कभी विनाश नहीं होता। सृष्टि का संचालन परमात्मा की कृपा से होता है। सत्य स्वरूप परमात्मा का वंदन करें। परमात्मा एक रूप में हैं। जब इच्छा होती है लीला के लिए अनेक रूप धारण कर लेते हैं। उक्त जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में जारी शिव महापुराण के दूसरे दिन भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे।

उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा करें। धर्म भी हमारी रक्षा करेगा। जिन्होंने सब महास्वरूप को त्याग दिया। उनके द्वारा जिस धर्म की प्रेरणा दी जाती है वो कल्याणकारी है। दैहिक, दैविक व भौतिक तापों को दूर करने वाला है। दिव्य महापुरुषों का सानिध्य मिल जाए सम्भव नहीं होता है। वही परम धर्म है। भगवान से कभी मांगना नहीं चाहिए। दूसरे प्रश्न के उत्तर में कहा कि परमात्मा की भक्ति की तो सभी देवी देवता प्रसन्न हो जाएंगे। जगत पिता परमात्मा शिव हैं। उनकी भक्ति श्रेष्ठ है। लेकिन परमात्मा सभी को नहीं दे देते। कहते हैं योग्यता होगी तभी दूंगा। परमात्मा की शरणा गति महापुरुषों के सानिध्य में मिलेगी। जहां उपदेश की उपेक्षा होती है वो कल्याणकारी नहीं होता है।

भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि पहला सुख निरोगी काया, जब तक शरीर पीड़ा रहित है तब तक इंसान को धर्म आराधना कर लेना चाहिये। शरीर में बुढ़ापा आने के बाद धर्म आराधना करना सम्भव नहीं होता है।