इस कार्यक्रम से नरोत्तम के विभागों का ना तो कोई सम्बन्ध है न ही वो भोपाल के प्रभारी मंत्री हैं| राजनीती में संकेतों का बड़ा महत्व होता है| सियासत में कभी कोई संकेत गलती से नहीं जाते बल्कि सोच समझ कर दिए जाते हैं..!

अखबारों में सरकारी विज्ञापन देखकर लोगों का चौकना स्वाभाविक था| इस घटनाक्रम को समझने के लिए चर्चाओं का दौर चल पड़ा है| ये सरकारी तंत्र की केवल गलती तो नहीं मानी जा सकती| अटकलों पर अगर यकीन करें तो ऐसा कहा जा रहा है कि केन्द्रीय गृह मंत्री के इशारे पर ही नरोत्तम को यह महत्व मिला है| राजनीति के जानकारों को  ये जानने समझने में कठिनाई कि जिन्हें हाल के दिनों में सरकार में उपेक्षित माना जा रहा है उन्हें अचानक दुसरे विभाग के सरकारी कार्यक्रम में इतनी तवज्जो क्यों दी गयी? राजनीतिक विश्लेषक इसके पीछे मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल में फेरबदल के संकेत देख रहे हैं| 

उनका मानना है कि शायद अमित शाह ने आज जिन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की शुरुआत की है और आदिवासियों के लिए जिन योजनाओं को चुनाव के पहले इम्प्लिमेंट करने का वायदा किया है उसके लिए शायद नरोत्तम मिश्र को ये विभाग सौंपे जाएँ| वैसे भी प्रदेश में मंत्री बनने के लिए लम्बी कतार है| 

अमित शाह के दौरे का मध्य प्रदेश सरकार  और संगठन की दशा और दिशा पर भी स्पष्ट प्रभाव पड़ना तय है| 

माना जा रहा है कि अमित शाह का यह दौरा सत्ता और संगठन के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा निर्देश के साथ मिशन 2023 के लिए बड़े रोडमैप का कारण बनने जा रहा है| 

इस दौरे में  शाह सरकार और संगठन के कामकाज का फीडबैक भी लेने जा रहे हैं|