भोपाल,

कोयले की कमी का असर मप्र का पॉवर प्लांट पर नजर आने लगा है। बिजली की कमी का असर घोषित-अघोषित बिजली कटौती के रूप में सामने आ रहा है आलम यह है कि तीन दिन पहले मुख्यमंत्री के प्रशासन अकादमी में हो रहे संबोधन के दौरान ही बिजली गुल हो गई। यह भी तब हुआ जब वे प्रदेश के तमाम आला अफसरों को सुशासन का पाठ पढ़ा रहे थे। जानकारों की मानें तो कम बिजली उत्पादन से जूझ रहे प्रदेश में बिजली महंगी होने में " जनरेशन कंपनी का गलत निर्णय भी शामिल है। क्योंकि पावर जनरेशन कंपनी की अलग अलग इकाईयों में बिजली उत्पादन की लागत अलग होती है।

अब जिस इकाई में सस्ती बिजली बनती है, उसकी बजाए महंगी बिजली बनाने वाली इकाई की अधिक कोयला भेजना प्रबंधन के फैसले पर सवाल खड़े कर रहा है। बताया जाता है कि बमुश्किल तो रेलवे के कोल रैक मिल रहे हैं, जिन्हें कोल प्लांट के करीब स्थापित प्लांट में पहुंचाने की बजाए सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थापित प्लांट में भेजा जा रहा है, जिसकी वजह से कोयला परिवहन के बाद महंगा जा रहा है।

खास बात यह है कि सरकार बिजली की कमी या कोयले के संकट से लगातार इंकार कर रही है। जबकि आलम यह है कि मप्र में लगभग

एक हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली की कमी बनी हुई है। अभी मांग 11 हजार मेगावाट के आसपास है। सूत्रों की मानें तो बिरसिंहपुर के संजय गांधी ताप गृह में 3.01 रुपये की एक यूनिट बिजली तैयार होती है। यह इकाई कोल माइंस के करीब है जिस वजह से स्थानीय स्तर पर कोयला प्लांट तक पहुंच जाता है। इसमें परिवहन खर्च भी कम रहता है जबकि खंडवा की श्री सिंगाजी पावर प्लांट में प्रति यूनिट बिजली की लागत 4.28 रुपये है। यहां कोयला परिवहन महंगा पड़ता है। इसलिए रेलवे को करीब 400 किलोमीटर का सफर तय कर कोयला पहुंचाना पड़ता है।

बिजली उत्पादन और कोयले की खपत

बताया जाता है कि अभी संजय गांधी ताप गृह तीन इकाई चल रही है इसमें तीनों इकाइयों 210-210 मेगावाट की जिसे करीब 135 से 140 मेगावाट के आसपास चलाई जा रही है। यहां पर कोयला का स्टॉक 32519 मीट्रिक टन बाकी है। यहां की रोजाना खपत फुल लोड चलाने पर 20 हजार मीट्रिक टन है।

सारणी की दो इकाई से 500 मेगावाट बिजली आ रही है कोयले का स्टॉक 51296 मीट्रिक टन है। प्रतिदिन कोयले की खपत 6-7 हजार मीट्रिक टन होती है।

श्री सिंगाजी में चारों इकाइयों चल रही है और 2 हजार मेगावाट बिजली मिल रही है। यहां कोयले की प्रतिदिन की खपत 35 हजार मीट्रिक टन है।

अमरकंटक ताप गृह में 210 मेगावाट की इकाई फुल लोड पर चल रही है। यहां कोयले खपत 3500 मीट्रिक टन है।