बिहार में एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज़ हैं। हालिया घटनाक्रम को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा को गच्चा देकर अब राजद के साथ मिलकर सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और 11 अगस्त तक सत्ताधारी जेडीयू और भाजपा गठबंधन टूट सकता है।
बिहार में तीनों टॉप राजनीतिक दलों में सरगर्मियां तेज़ हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सभी सांसद और विधायकों को 10 अगस्त तक पटना पहुंचने को कहा है। वहीं राजद ने भी अपने सभी विधायकों को पटना में रहने के लिए कहा है। मंगलवार को तेजस्वी यादव की विधायकों के साथ बैठक होना है।
बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी बात की है। वहीं JDU के एक सांसद ने यहाँ तक कह दिया है कि बिहार की राजनीति में टर्निंग पॉइंट आ चुका है। नीतीश जो फैसला लेंगे वो सर्वोपरि होगा।
बीते कुछ समय से भाजपा और जदयू के बीच दूरी लगातार बढ़ती दिख रही है। जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर नीतीश कुमार भाजपा से अलग-थलग नजर आ रहे हैं। सरकार चलाने में फ्री हैंड नहीं मिलने से भी नीतीश नाराज बताये जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के समय चिराग पासवान प्रकरण के बाद अब नीतीश आरसीपी सिंह के मामले को लेकर भी भाजपा से खफा हैं। बीते कुछ महीने में नीतीश ने कई अहम बैठकों से दूरी रहे हैं।
वर्तमान में जदयू के पास 45 विधायक हैं। सरकार बनाने के लिए नीतीश को 77 विधायकों की जरूरत है। अगर राजद के 79 विधायक साथ आते हैं तो इस गठबंधन के पास 124 सदस्य हो जाएंगे, जो बहुमत से ज्यादा हैं। बताया जा रहा है कि इस गठबंधन में कांग्रेस के 19 और कम्युनिस्ट पार्टी के 12 विधायकों के भी शामिल होने की संभावना है।