भोपाल: राज्य सरकार ने देशी शराब बनाने वाली डिस्टीलरियों के लिये नया प्रावधान लागू कर दिया है। अब ये डिस्टीलरियां देशी शराब के निर्माण में लगने वाली स्प्रिट एवं ईएनए यानि एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल का अन्य राज्यों से आयात नहीं कर सकेंगी तथा उन्हें अपनी ही डिस्टीलरी में इनका निर्माण करना होगा।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में देशी शराब बनाने के डी-1 नाम से 11 लायसेंस हैं तथा प्रत्येक लायसेंस प्राप्त डिस्टीलरी को देशी शराब की आवंटित जिलों में सप्लाय हेतु सीएस-1 लायसेंस के अंतर्गत 11 तथा देशी शराब की बाटलिंग हेतु सीएस-बी के अंतर्गत 13 लायसेंस इश्यु किये गये हैं। ये डिस्टीलरियां देशी शराब की सप्लाय हेतु अन्य राज्यों से स्प्रिट एवं ईएनए भी मंगा रही थीं जबकि उन्हें अपनी ही डिस्टलरी में इनका उत्पादन करना चाहिये। यदि उनकी डिस्टलरी की क्षमता नहीं है तो उन्हें क्षमता बढ़ाना चाहिये थे।
इसीलिये अब राज्य सरकार ने 26 साल पुराने मप्र देशी स्प्रिट नियम 1995 में बदलाव कर यह बंधन कर दिया है कि ये डिस्टलरियां अब अपनी ही फैक्ट्री में स्प्रिट एवं ईएनए निर्मित करेंगी तथा बाहर से इनके आयात की अनुमति नहीं होगी। उक्त प्रावधान से अब सभी लायसेंस प्राप्त डिस्टलरियों को स्वयं ही स्प्रिट एवं ईएनए का निर्माण करना होगा तथा उत्पादन क्षमता नहीं है तो इसे बढ़ाना होगा।