भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इंडियन प्लेयर्स के विदेशी लीग में खेलने पर नए नियम लागू कर सकता है। ऐसा होने पर खिलाड़ी रिटायर होने के ठीक बाद दूसरे देशों की फ्रेंचाइजी लीग नहीं खेल सकेंगे, उन्हें बीसीसीआई से नो- ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा। साथ ही उन्हें रिटायरमेंट के बाद कुछ महीनों या साल का कूलिंग ऑफ पीरियड भी सर्व करना पड़ सकता है।

इंटरनेशनल और घरेलू क्रिकेट से रिटायर हो चुके भारतीय खिलाड़ी पिछले दिनों यूएई की इंटरनेशनल लीग टी- 20 में खेलते नजर आए। विदेशी लीग में खेलने वाले खिलाड़यों के लिए अब तक कोई पॉलिसी नहीं । बीसीसीआई नई पॉलिसी लाना चाहता है।

खिलाड़ियों के लिए कूलिंग ऑफ पीरियड का नियम भी ला सकता है। जिसके तहत खिलाड़ी रिटायर होने के कुछ महीनों या साल बाद ही विदेशी लीग खेल सकेंगे। रिटायर हो चुके खिलाड़यों को इन लीग्स में खेलने के लिए बीसीसीआई से परमिशन लेनी पड़ सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद विदेशी लीग खेलने के लिए नियम बनाने की 2 वजह हैं। खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास के बाद भारत में घरेलू क्रिकेट खेले भारतीय खिलाड़यों से विदेशी लीग की वैल्यू बढ़ती है। आईपीएल की वैल्यू बनी रहे, इसीलिए बीसीसीआई कूलिंग ऑफ पीरियड ला सकती है।