अक्टूबर-नवंबर के दौरान भारत में वनडे वर्ल्ड कप खेला जाएगा। उससे पहले 50 ओवर का एशिया कप भी होगा। भारत को एक अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताने और 2 बार रनर-अप बनाने वाले कोच राहुल द्रविड़ अगर इनमें भी फेल रहे तो टीम को विदेशी कोच अपॉइंट करने पर विचार जरूर करना चाहिए, क्योंकि टीम ने 5 में से 3 आईसीसी ट्रॉफी विदेशी हेड कोच की मौजूदगी में जीती है ।

टीम इंडिया के पूर्व सिलेक्टर संजय जगदाले ने विदेशी कोच और भारतीय कप्तान के कॉम्बिनेशन पर कहा कि ये बिल्कुल ही बेबुनियाद सा तर्क है कि कोच के होने से टीम के ट्रॉफी जीतने पर बहुत ज्यादा फर्क पड़ जाता है। भारतीय कोच के साथ भी टीम ने मैच जीते, बस ट्रॉफी जीतने से कुछ कदम ही दूर रह गए। हालांकि जॉन राइट के रूप में भारत ने पहली बार विदेशी कोच चुना था और उन्होंने ही टीम में युवा खिलाड़ियों, यूनिटी और फिटनेस का महत्व बताया। उन्होंने ही सौरव गांगुली के साथ टीम के खेलने का नजरिया बदला, लेकिन वही नजरिया आज के कोच भी अपनाने लगे हैं। अब टीम को ट्रॉफी जिताने की जिम्मेदारी कप्तान पर ज्यादा होती है।

टीम इंडिया फाइनल और ज्यादातर आईसीसी ट्रॉफी विदेशी मैदानों पर कमजोर बैटिंग टेक्नीक के कारण हारी। टीम को अब ट्रॉफी जीतने के लिए नई टीम बनाने पर फोकस करना चाहिए। रोहित शर्मा, जो खुद टेस्ट टीम में पिछले 2-3 सालों में ठीक से जगह बना सके, उन्हें इस फॉर्मेट का कप्तान नहीं होना चाहिए।

शास्त्री से फिर शुरू हुए भारतीय कोच

बताया गया कि 2015 वर्ल्ड कप के बाद 2016 तक रवि शास्त्री को टीम इंडिया के मैनेजर का रोल मिला। शास्त्री के साथ टीम इंडिया 2016 के टी-20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल तक पहुंची। 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान अनिल कुंबले भारत के हेड कोच थे, तब हम पाकिस्तान से फाइनल हार गए थे।

29 साल तक हेड कोच भारतीय ही रहा

1971 में वनडे क्रिकेट की शुरुआत से ही भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का हेड कोच भारतीय ही रहा। केकी तारापूर भारत के पहले कोच थे 1975 का वनडे वर्ल्ड कप हमने गुलाबराय रामचंद की कोचिंग में खेला। 1979 में कोई हेड कोच नहीं था। दोनों ही बार श्रीनिवास वेंकटराघवन टीम इंडिया के कप्तान थे। 1983 में कपिल देव की कप्तानी में भारत ने वर्ल्ड कप जीता, तब पीआर मान सिंह हेड कोच थे।