र्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने मजबूत शुरुआत की है। रोहित शर्मा फाइनल मुकाबले में चार तेज गेंदबाज और एक स्पिनर के बॉलिंग कॉम्बिनेशन के साथ उतरे। टीम में स्पेशलिस्ट स्पिनर रविचंद्रन अश्विन की जगह रवींद्र जडेजा को अहमियत दी गई। अश्विन को मौका दिया जा सकता था, क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई टीम में 5 लेफ्ट हैंडर बैटर्स हैं। 

जडेजा की लेफ्ट आर्म स्पिन प्रभावी नहीं रही। अश्विन ने 241 बार लेफ्टी बैटर्स को आउट किया है, जबकि 233 बार उन्होंने राइट हैंड बैटर्स के विकेट भी लिए हैं। दूसरी ओर जडेजा ने राइटी बैटर्स को 174 और लेफ्टी बैटर्स को 90 बार आउट किया है। दिग्गज सुनील गावसकर ने भी प्लेइंग 11 जारी होने के बाद कहा कि 5 लेफ्ट हैंड बैटर्स के सामने अश्विन को मौका दिया जाना चाहिए था, लेकिन जडेजा को उनकी बैटिंग के कारण प्राथमिकता मिल गई ।

टॉस के बाद शुरुआती कुछ ओवर्स तक भारतीय गेंदबाजों को अच्छी स्विंग मिली। तब लंदन के आसमान में बादल थे। ऐसे में पिच में नमी थी, जो स्विंग में मदद कर रही थी। भारतीय कप्तान और बॉलर्स की रणनीति भी कमजोर रही।

तेज गेंदबाजों ने शुरुआत में गुड लेंथ पर बॉलिंग की और विकेट निकाले, लेकिन लाबुशेन के विकेट के बाद हमारे बॉलर ट्रेविस हेड पर दवाब नहीं बना सके। हेड शॉर्ट बॉल पर जल्दी आउट हो जाते हैं, लेकिन बॉलर्स ने उन्हें शुरुआत में शॉर्ट पिच गेंदें कम फेंकीं। उन्हें फुलर और गुड लेंथ गेंदें फेंकीं, जिस पर उन्होंने अटैकिंग शॉट्स खेले और तेजी से 90 रन के स्कोर तक पहुंच गए। 

बॉलर्स ने जब हेड पर बाउंसर अटैक किया, तब तक वे सेट हो चुके थे। अगर हेड पर शुरुआती ओवरों में बाउंसर फेंके जाते तो विकेट के मौके ज्यादा बनते। यहां कप्तान रोहित स्मिथ और हेड की रणनीति को भांप नहीं पाए। टॉप-3 विकेट गिरने के बाद स्मिथ एक ओर से संभलकर बल्लेबाजी कर रहे थे।