बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट में 8 विकेट लेकर मैन ऑफ द | मैच चुने गए कुलदीप यादव को आज से शुरू हुए दूसरे टेस्ट से बाहर कर दिया गया है। दो साल बाद टीम में वापसी करते हुए मैच विनिंग परफॉर्मेंस देने वाले इस चाइना मैन की जगह मीडियम पेसर जयदेव उनादकट को मौका मिला है। पिच में नमी है। तेज गेंदबाजों को मदद मिलने के आसार हैं। ऐसे में घरेलू क्रिकेट में जबरदस्त प्रदर्शन करके आ रहे जयदेव उनादकट को 12 साल बाद कमबैक का मौका मिला है।

मैच की बात करें तो बांग्लादेशी टीम ने अच्छी शुरुआत के बाद अपने दोनों ओपनर गंवा दिए। चार गेंदों में दो विकेट निकालकर भारत ने बढ़िया वापसी की। शंटो को जयदेवउनादकट तो जाकिर हसन को अश्विन ने आउट किया, लेकिन बांग्लादेश ने पलटवार कर लिया है। पहले सत्र खत्म होते-होते स्कोर अब 39 / 2 से 82 / 2 हो चुका है। चार गेंद के भीतर बांग्लादेश ने अपने दोनों ओपनर्स गंवा दिए हैं। अनुभवी ऑफ स्पिनर अश्विन ने नजमुल हसन टोको एलबीडब्ल्यू किया। बांग्लादेश ने रिव्यू जरूर लिया, लेकिन फैसले उनके खिलाफ ही गया। 57 गेंद में 24 रन की पारी का अंत । 39 रन पर दो विकेट गिर गए।

इस मैच के लिए टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में दो स्पिनर हैं और दोनों का गेंदबाजी स्टाइल अलग है। अश्विन दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर हैं तो अक्षर बाएं हाथ के फिंगर स्पिनर । उमेश यादव, मोहम्मद सिराज और जयदेव उनादकट के रूप में तीन पेसर्स के साथ मैदान

पर उतरना भारत का अजीब फैसला है। जब तीसरे दिन के बाद से पिच में टर्न होगी तो एक स्पिनर की जगह सीमर को लाना चौंकाता है। कुलदीप यादव को बाहर करने के इस निर्णय को सही ठहराने का एकमात्र तरीका यह है कि उनादकट पहले सीजन में जरूरी विकेट उखाड़े।

भारतीय टीम में सुभाष गुप्ते, भागवत चंद्रशेखर, अनिल कुंबले जैसे महान कलाई स्पिनर्स हुए, जो टीम इंडिया को अकेले अपने दम पर मैच जिताते थे, लेकिन लगता है कि बीते कुछ साल से टीम मैनेजमेंट अपने इस हथियार का इस्तेमाल करना ही नहीं चाहता। जिस तरह आज कुलदीप यादव को मैच विनिंग परफॉर्मेंस के बाद टीम से निकाल दिया गया ठीक उसी तरह 2010 में अमित मिश्रा के साथ भी अन्याय हुआ था।