भारत में 5 अक्टूबर से वनडे वर्ल्ड कप खेला जाना है और अब 101 दिन का समय बचा है। भारत का टीम मैनेजमेंट अब भी परफेक्ट कॉम्बिनेशन तलाशने में जुटा है। ऐसे में सिलेक्टर्स भी टीम मैनेजमेंट के सामने हर स्पॉट के लिए कई विकल्प रखना चाहते हैं। यही कारण है कि पिछले एक साल से टीम के हर स्पॉट के लिए अलग-अलग खिलाड़ियों को आजमाया जा रहा है।

सूर्यकुमार यादव को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू करने का मौका दिया गया, तो तेज गेंदबाजी मोर्चे पर युवा उमरान मलिक जैसे टैलेंट को खिलाया गया। टीम से बाहर चल रहे स्पिनर कुलदीप यादव ने भी वापसी की। स्पेशलिस्ट बल्लेबाज और गेंदबाज के भी कई ऑप्शन तलाशे गए, लिहाजा इन डिपार्टमेंट में सिलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट को बहुत ज्यादा माथापच्ची करने की जरूरत महसूस नहीं हो रही है।

इन सबसे अलग एक डिपार्टमेंट ऐसा है, जिस पर स्पष्ट जवाब न तो अभी सिलेक्टर्स के पास है और न ही किसी क्रिकेट एक्सपर्ट के पास। यह डिपार्टमेंट है विकेटकीपिंग का। दरअसल,  पंत चोटिल हैं और बीसीसीआई की मेडिकल टीम उन्हें समय पर फिट करने की कोशिश कर रही है, अगर पंत फिट नहीं हो पाते हैं, तो उनकी जगह फर्स्ट चॉइस विकेटकीपर कौन होगा इस पर सस्पेंस है। 

पंत का बैटिंग रिकॉर्ड देखें तो वे हर परिस्थिति में रन बनाते हैं। पंत ने घरेलू मैदान पर 36.76 की एवरेज से 478 रन बनाए हैं, जबकि विदेशी पिचों पर 33.66 की औसत से 303 रन बनाए। बैटिंग लाइन-अप में वैराइटी लाते हैं-पंत लेफ्टी बैटर हैं, जबकि भारत के टॉप-ऑर्डर में नंबर-4 तक सभी राइट हैंडर ही हैं। ऐसे में पंत की मौजूदगी से बैटिंग ऑर्डर में वैरायटी आती है।

राहुल के पास वर्ल्ड कप का भी अनुभव

केएल राहुल 2019 का वनडे वर्ल्ड कप भी खेल चुके हैं। तब उन्होंने 9 मैच में 45 की औसत से 361 रन बनाए थे। हालांकि तब वे स्पेशलिस्ट बल्लेबाज के तौर पर खेले थे। राहुल की हालिया खराब फॉर्म भी उनकी दावेदारी कमजोर कर सकती है, हालांकि उनके अनुभव और बैटिंग के कारण उन्हें तवज्जो दी जा सकती है। राहुल ने भारत के लिए 54 मैचों में विकेट के पीछे 32 कैच पकड़े हैं, जबकि दो बैटर्स को स्टंप आउट भी किया है। 

राहुल स्पिन और पेस बॉलिंग खेलने में सक्षम हैं। उनमें बड़े शॉट्स खेलने की क्षमता है। फील्डिंग उनके अनुरूप नहीं हो तो भी गैप निकालते हैं। फिटनेस के मामले में राहुल कमजोर नजर आते हैं। बैटिंग करते समय उन्हें इंजरी होने का चांस हमेशा बना रहता है। वे अभी भी रिहैब कर रहे हैं। ऐसे में उनका चयन काफी हद तक फिटनेस पर भी निर्भर करेगा हैं। वहीं पिछली 10 पारियां देखें तो ईशान के बल्ले से एक दोहरा शतक और 3 अर्धशतक निकले हैं, लेकिन किशन 5 दफा 20 या फिर इससे कम के स्कोर पर आउट हुए हैं। विकेट के पीछे प्रदर्शन की बात करें तो ईशान किशन ने 5 कैच पक? हैं और दो स्टॉपिंग की हैं।

सैमसन हो सकते हैं विकल्प 

केरल के विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन भी भारतीय टीम में जगह के लिए प्रबल दावेदार हैं। हालांकि बीच-बीच में संजू सैमसन टीम से बाहर होते रहे हैं कभी फॉर्म के कारण तो कभी चोट के कारण संजू टेक्निकल रूप से अच्छे बैटर हैं। खराब और अच्छी दोनों तरह की गेंदों पर शॉट्स खेलना जानते हैं और प्रेशर भी हैंडल कर लेते हैं। वे पंत की जगह 5वें नंबर पर फिट भी बैठते हैं, इसलिए टीम मैनेजमेंट इन पर विचार कर रही है। 

अब तक खेले 11 वनडे में सैमसन ने 330 रन वनडे फॉर्मेट के हिसाब से स्ट्राइक रेट मैटेन करना बनाए हैं। उनके नाम 7 कैच और दो स्टंपिंग हैं। जानते हैं। सैमसन धैर्य रख कर बल्लेबाजी करते हैं। आसानी से विकेट नहीं गंवाते और फुल टाइम विकेटकीपिंग करते हैं। बड़े टूर्नामेंट का अनुभव नहीं है। इंजरी होने का चांस रहता है। संजू की बैटिंग में निरंतरता नहीं है। पिछली 10 पारियों में वे दो फिफ्टी ही जमा सके हैं। ईशान भी पंत की जगह के दावेदार माने जा रहे हैं। वनडे क्रिकेट में बांग्लादेश के खिलाफ ईशान दोहरा शतक लगा चुके हैं।