भोपाल: राज्य सांख्यिकीय आयोग सक्रिय हो गया है तथा उसने आठ सरकारी कार्यालयों से रियल टाईम डाटा मांगा है। इससे आयोग प्रदेश में क्रियान्ल्वित की जा रही योजनाओं तथा सांख्यिकी समंकों के सुदृढ़ीकरण तथा व्यापक आर्थिक सूचकांक सृजित करेगी।
आयोग ने खनिज विभाग से कहा है कि वह जिला स्तर पर रियल टाईम डाटा उपलब्ध कराये जिससे खनन की मात्रा एवं उससे प्राप्त राजस्व की जानकारी मिल सके। पशुपालन विभाग से कहा है कि विभाग द्वारा वर्ष में 3 बार दूध, अण्डा एवं मांस उत्पादन का सर्वे कराया जाता है तथा वह जिला, तहसील तथा ब्लाक स्तर पर डाटा पोर्टल पर उपलब्ध करवाये।
मत्स्य विभाग से आयोग ने कहा है कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन की जिला तथा ग्रामीण स्तर तक की जानकारी मासिक तथा दैनिक प्रदर्शित करने हेतु ऑनलाईन पोर्टल बनाया जाये। वन विभाग से कहा गया है कि प्रदेश में जिला स्तरीय, वस्तुवार रियल टाईम डाटा रियल टाईम डाटा आनलाईन उपलब्ध कराया जाये क्योंकि विभाग की भविष्य की योजनाओं में बारहसिंगा का अंगीकरण, लघु वनोपज आधारित उद्योगों तथा मधुमक्खी पालन तथा औषधीय पौध रोपण की जानकारी दी है।
जल संसाधन विभाग से कहा गया है कि वह सिंचाई के लिये प्रत्येक जिले में कितना पानी का विचतरण हुआ, उसका रिकार्ड उपलब्ध कराकर बताये। कृषि विभाग से कहा गया है कि फसल क्षेत्र में केंद्र एवं कृषि संचालनालय द्वारा प्रकाशित अनुमानों में धान और गेंहू के क्षेत्रफल एवं उत्पादन में ज्ञिन्नता पाई गई है, इसलिये विगत पांच वर्षों में अंतिम अनुमानों की जानकारी उपलब्ध कराये जिससे अनुमानों में आये अंतर का कारण स्पष्ट हो सके।
उद्यानिकी विभाग से कहा गया है कि गिरदावरी ऐप के माध्यम से समस्त डाटा आनलाईन किया जाये। पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक के लिये राज्य स्तरीय प्रशिक्षण नियमित रुप से दिया जाना चाहिये, परन्तु इस पर तीन-चार वर्षों से अमल नहीं हो रहा है।
आयोग ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से यह भी कहा है कि वे जिला स्तर पर एक ही प्रपत्र के माध्यम से फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन, मात्रा, भाव आदि की जानकारी आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय को प्रेषित कर आंकड़ों संबंधित विभाग के पोर्टल पर भी उपलब्ध कराये।