भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेद ने दिल्ली भाजपा मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि, एबीजी शिपयार्ड 30 नवंबर 2013 को एनपीए हो गई। ये कांग्रेस शासन का कालखंड था। सबसे ज्यादा हेराफेरी 2005-2012 के बीच हुई है। जिसमें उन्हें नौसेना का एक बड़ा करार यूपीए सरकार ने दिया, जिसे हमारी सरकार ने आकर रद्द किया था।

 

डॉ. सुधांशु त्रिवेद के अनुसार, जिस 22,000 करोड़ रुपये के घोटाले की बात कही गई थी, वो 2012 में शुरु हुआ था। मार्च 2014 में एबीजी शिपयार्ड के लोन का पुनर्निधारण किया गया। जून 2011 में 970 करोड़ रुपये, जनवरी 2012 में 500 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया गया था, लेकिन मार्च 2014 में रिस्ट्रक्चरिंग कर दी गई। बीजेपी प्रवक्ता ने आगे कहा कि, कांग्रेस ये बताए कि इस सबसे बड़े घोटाले में उनकी संलिप्तता क्या थी ? मान्यता के अनुसार इस कंपनी के मालिकों का घनिष्ठ संबंध कांग्रेस अध्यक्षा के पूर्व राजनीतिक सलाहाकार से था।