राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार समेत राजस्थान और उत्तरप्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों की कार्रवाई अभी भी नाकाफी है और बिना नंबर प्लेट वाले वाहन खुलेआम रेत परिवहन कर रहे हैं।
कोर्ट ने 6 महीने के भीतर निगरानी तंत्र विकसित करने, सीसीटीवी कैमरे लगाने और अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की जब्ती के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 20 मई की सुनवाई के बाद 26 मई को विस्तृत आदेश जारी किया।
कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन केवल कानून उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि पर्यावरणीय विनाश, वन्यजीवों के आवास खत्म होने और संगठित अपराध का विषय बन चुका है।सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि कई महत्वपूर्ण फैसले और कार्रवाई तब शुरू हुईं, जब वरिष्ठ अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी तय की गई। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन जैसे गंभीर मामलों में प्रशासनिक तंत्र की यह सुस्ती चिंताजनक है।
कोर्ट ने आर्गनाइज्ड इललीगल माइनिंग नेटवर्क शब्द इस्तेमाल किया, यानी इसे सिर्फ छोटे स्तर का अवैध खनन नहीं माना गया। जो पर्यावरण, वन्यजीव और कानून व्यवस्था तीनों के लिए खतरा बन चुका है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कोर्ट के दबाव में होने वाली औपचारिक कार्रवाई नहीं हो सकती, यह राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है।