सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लखीमपुर हिंसा मामले में मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान मृतक किसानों के परिवारों की तरफ़ से पेश वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि हाईकोर्ट ने जमानत में जल्दबाज़ी कर कई तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया।
Lakhimpur Kheri violence | Advocates CS Panda & Shiv Tripathi urge SC to cancel bail plea of Ashish Mishra
— ANI (@ANI) April 4, 2022
UP govt counsel: We got the report(SIT)on Friday & sent it to State govt
CJI: You didn’t respond when letter was written.This is not a matter where you’ve to wait so much pic.twitter.com/7G8GzXrAXP
उन्होंने कहा कि, हत्या करना एक गंभीर मामला है। सुप्रीम कोर्ट में कुछ याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आरोपी की जमानत रद्द नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने कहा, हम जानते हैं कि हमें क्या करना है। दूसरी ओर, यूपी सरकार की तरफ़ से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए आवेदन दायर करने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि इस मामले में हाईकोर्ट का फ़ैसला पहले ही आ चूका है।
क्या हुआ सुनवाई में..!
सुनवाई की शुरुआत में, अधिवक्ता सी.एस पांडा ने कहा कि वह चाहते हैं कि आशीष मिश्रा की जमानत खारिज कर दी जाए क्योंकि हाईकोर्ट ने कानूनी सिद्धांतों पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि उन्हें एसआईटी से निर्देश मिले हैं, जिन्हें राज्य सरकार को भेज दिया गया है और जवाब आना बाकी है।
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पत्र बहुत पहले जारी किया गया था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और अभी और समय मांगा जा रहा है। जेठमलानी ने कहा कि जमानत रद्द करने का सुझाव देते हुए गवाहों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था। राज्य सरकार ने तब सभी गवाहों को पुलिस सुरक्षा प्रदान की थी। बताया गया कि 97 गवाहों को फोन कर सुरक्षा के बारे में पूछा गया, लेकिन किसी ने भी खतरे के बारे में नहीं बताया।
मृतक किसानों के परिवारों की तरफ़ से पेश वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि आशीष के पिता केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा किसानों को धमकी दे रहे थे। उपमुख्यमंत्री का रास्ता बदलने के बाद किसान घर जा रहें थे, उनपर पीछे से हमला किया गया था। दवे ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) ने विस्तृत जांच की है। वीडियो और ऑडियो, सभी गवाह रिकॉर्ड किए गए। दुष्यंत दवे ने कहा कि आरोपी को जमानत देने से इनकार करने में मामला काफी उचित था। साथ ही सुनवाई से पहले ही SIT ने अपनी जाचं रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की.
क्या कहा आशीष के वकील ने ?
वहीं आशीष के वकील रंजीत कुमार ने कहा कि पुलिस को किसानों ने रिपोर्ट में कहा गया है कि किसान की गोली मारकर हत्या की गई। हाईकोर्ट ने तब कहा था कि कोई गोली नहीं चली थी। किसानों ने यह भी कहा कि आशीष गन्ने के खेत की तरफ़ भागे थे। लेकिन घटना स्थल पर गन्ने का कोई खेत नहीं था। वकील ने यह भी कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट आशीष को जमानत नहीं देगा तो फ़िर कौन देगा ? मुझे विस्तार से जवाब देने के लिए 3 दिन का समय दें। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हिंसा हुई थी। वहां किसान विरोध कर रहे थे, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी।