भोपाल: भारतीय सर्वेक्षण ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश के जंगल आग से धड़क रहें है. एफएसआई फायर सिस्टम के अनुसार प्रदेश के जंगलों में 23 214 स्थानों पर आग लगी है. आगजनी की घटनाओं से नेशनल पार्क और सेंचुरिया भी अछूती नहीं रही किंतु माधव नेशनल पार्क सबसे अधिक प्रभावित रहा. माधव नेशनल पार्क शिवपुरी सीसीएफ सीएस निनामा पार्क में पुरानी मान्यता के चलते बल्लारी माता के अनुयाई स्वयं आग लगाते हैं. जिला प्रशासन भी उनके इस कृत्य को रोकने में नाकाम रहा है. 

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( संरक्षण ) भोपाल सर्किल के ओबैदुल्लागंज, रायसेन, और सीहोर वन मंडल मैं सर्वाधिक की घटनाएं घटी है.माधव नेशनल पार्क शिवपुरी, नौरादेही सेंचुरी और सपना के जंगल भी आग से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. एफएसआई के फायर अलर्ट सिस्टम में दर्ज घटनाओं के आधार पर खंडवा, देवास, बुरहानपुर, दक्षिण बालाघाट और  दमोह के जंगल में आग में झुलसे हैं. गत वर्ष की तुलना में इस बार आंख की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. जबकि आगजनी को रोकने के लिए कैंपा फंड से ढाई करोड़ रुपए से अधिक का इक्विपमेंट खरीदे गए है. इन सबके बाद भी 5 से 7 दिन तक जंगल धड़कते रहे और उसे मैदानी अमला बुझा नहीं पाया. इस बात का जिक्र पिछले दिनों वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान एपीसीसीएफ अजीत श्रीवास्तव ने फील्ड के अधिकारियों को अवगत कराया था. साथ ही यह भी निर्देशित किया था कि अगले 15 से 20 दिन विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.

हम बेबस रहे, उन्हें आग लगाने से रोक नहीं सके :

माधव नेशनल पार्क शिवपुरी में पदस्थ सीसीएफ सीएस निनामा कहते हैं कि पार्क के भीतर बल्लारी माता का मंदिर है. नवरात्र में माता के अनुयाई यहां दर्शन के लिए आते हैं और आग लगा कर चले जाते हैं. बताते हैं कि पुरानी परंपरा है कि मंदिर में आने वाला हर शख्स यह कहता है कि हम नया करके जाएंगे और आग लगाकर वाह लौट जाता है. इस परंपरा को रोकने के लिए लोगों में जन-जागरण पर लाने के लिए पंपलेट बटवाएं.  जिला प्रशासन से मदद भी मांगी. जिला प्रशासन ने भी कोई मदद नहीं की. आग लगाने वालों में से कुछ को चिन्हित किया है. उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया है.

वन समितियों को जोड़ने में विभाग रहा असफल : 

हिमाचल प्रदेश में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए आमजन को एफ एस आई के फायर अलर्ट सिस्टम से जुड़ने में देशभर में टॉप पर है. वह करीब 48000 लोगों के मोबाइल पर फायर अलर्ट सिस्टम मैं पंजीयन करा चुका है. जबकि मध्यप्रदेश की रफ्तार बहुत ही धीमी हैं. अब तक केवल 11000 लोगों के मोबाइल सिस्टम से जुड़ा है. जबकि प्रदेश में 15000 से अधिक वन समितियां हैं. संरक्षण शाखा के एपीसीसीएफ श्रीवास्तव बताते हैं कि वे अभी विभाग के वीट गार्ड तक के मोबाइल इस सिस्टम से जुड़ रहे हैं. इसके बाद वन समितियों को जोड़ा जाएगा.