जर्मन कार मेकर कंपनी पोर्शे जल्द ही भारत में अपनी कारों को असेंबल करने के लिए प्लांट लगा सकती है। कंपनी ने यह फैसला केयेन को मिल रहे रिस्पॉन्स को देखते हुए लिया है। प्रोर्शे ने जुलाई में केन और केन कूप का फेसलिफ्ट वर्जन लॉन्च किया था।
पोर्शे के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि कंपनी भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में अपनी जगह बनाना चाहती है। इसलिए वे कार को सीधे इंपोर्ट करने के बजाए असेंबल करने के बारे में सोच रहे हैं। इससे की असेंबलिंग भारत में करने से टैक्स बेनिफिट्स मिलेंगे और कार की कॉस्ट को कम रखने में मदद मिलेगी।
बता दें कि देश में 40 हजार डॉलर यानी करीब 33.19 लाख रुपए से ज्यादा की कार को इम्पोर्ट करने पर 100 फीसदीटैक्स देना पड़ता है। इससे कम कीमत वाली कारों पर 70 फीसदी इम्पोर्ट ड्यूटी लगती है । इम्पोर्ट ड्यूटी में टोटल कॉस्ट, इन्श्योरेंस और ट्रांसपोर्ट का खर्च शामिल है। वहीं, कंपनियों को कार के कंपोनेंट्स और पार्ट्स इम्पोर्ट करने पर 15 से 35 फीसदी तक टैक्स देना पड़ता है।