भोपाल। राज्य सरकार ने अधिसूचित कृषि उपजों के ऑनलाईन व्यापार एवं ई-प्लेटफार्म बनाने का प्रावधान लागू तो किया और इसके तहत एक कंपनी को लायसेंस भी दिया परन्तु इस कंपनी को अपना कारोबार शुरु करने के लिये मंडी परिसर में भूमि ही उपलब्ध नहीं कराई। इससे यह कंपनी अपना ऑनलाईन कारोबार शुरु नहीं कर पाई है और राज्य मंडी बोर्ड एवं मंडी समिति कार्यालयों के चक्कर लगा रही है। जबकि लायसेंस की शर्तों में शामिल है कि मंडी परिसर में कंपनी को कलेक्टर दर से भूमि उपलब्ध कराई जायेगी।
ऑनलाईन व्यापार एवं ई-प्लेटफार्म हेतु मेसर्स स्टार एग्री बाजार टेक्नोलॉजी लिमिटेड भोपाल को लायसेंस मिला है। इसने अपने कारोबार को शुरु करने के लिये जब चार कृषि उपज मंडियों यथा इंदौर, उज्जैन, देवास एवं छिन्दवाड़ा में एक हजार वर्गफीट की भूमि मांगी तो उसे वहां के मंडी सचिवों द्वारा यह कहकर टरका दिया कि राज्य मंडी बोर्ड मुख्यालय से इस बारे में मार्गदर्शन मांगेंगे।
इससे उक्त कंपनी फिर मंडी बोर्ड मुख्यालय पर चक्कर काट रही है। मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक विकास नरवाल ने भी उक्त मंडी समितियों के सचिवों को फौरी कार्यवाही करते हुये लिख दिया है कि यदि मंडी परिसर में भूमि उपलब्ध हो तो कलेक्टर दर पर नियमानुसार भूमि उपलब्ध करा दी जाये। अब फिर उक्त कंपनी इन मंडी समितियों के कार्यालयों में चक्कर लगा रही है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा देश के कृषकों की आय में वृद्धि हेतु अपनी अति महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कृषि बाजार परियोजना (ई-नाम) के अंतर्गत कृषि उपज की नीलामी, खरीदी-बिक्री के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार की इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म अवधारणा प्रवर्तित की गई है। उसी के तहत उक्त कंपनी को मई 2021 में राज्य मंडी बोर्ड ने लायसेंस दिया हुआ है। लेकिन लायसेंस की शर्तों अनुसार उसे अब तक अपना ऑनलाईन कारोबार करने हेतु इन मंडी परिसरों में अब तक भूमि ही उपलब्ध नहीं हो पाई है।