भोपाल: राज्य सरकार ने श्रम विभाग के आठ पुराने नियमों यथा मप्र कर्मचारी बीमा न्यायालय नियम 1963, मप्र राज्य कर्मचारी बीमा चिकित्सा सेवा प्रणाली नियम 1959, कर्मचारी राज्य बीमा नियम 1981 की योजना के अधीन स्थापित मप्र चिकित्सा संस्थान आपूर्ति प्रावधान, मप्र कर्मचारी क्षतिपूर्ति नियम 1962, मप्र कर्मचारी क्षतिपूर्ति व्यावसायिक रोग नियम 1963, मप्र मातृत्व हितलाभ नियम 1965, उपादान भुगतान मप्र नियम 1973 तथा मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार रोजगार का विनियमन एवं सेवा शर्तें नियम 2002 खत्म कर उन्हें नये बनाये मप्र सामाजिक सुरक्षा नियम 2026 में समाहित कर दिया है तथा ये नये नियम आगामी 20 जून 2026 के बाद पूरे प्रदेश में प्रभावशील हो जायेंगे।

दैनिक मजदूरी अवधि निर्धारित की :

नये मप्र सामाजिक सुरक्षा नियमों में दैनिक मजदूरी अवधि भी निर्धारित की गई है। यदि किसी मजदूर को मासिक आधार मजदूरी दी जाती है तो उसकी दैनिक दर 26 से विभाजित की जायेगी और यदि पाक्षिक आधार पर दर निर्धारित की जाती है तो 13 से विभाजित की जायेगी। इसी प्रकार, साप्ताहिक आधार पर रखे मजदूर की मजदूरी को 6 से विभाजित कर निर्धारित किया जायेगा एवं दैनिक आधार पर रखे मजदूर की मजदूरी का निर्धारण 1 से विभाजित कर निकाला जायेगा। इसके अलावा, जहां कोई भी रात्रि पारी आधी रात के बाद जारी रहती है, तो आधी रात के बाद की रात्रि पारी की अवधि को उस दिन की गणना के लिये गिना जायेगा, जो पहले के दिन के हिस्से के रुप में मजदूर काम करता था।

गिग वर्करों को भी मिलेगा लाभ :

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के अनुसार, नये मप्र सामाजिक सुरक्षा नियम के अध्याय नौ में असंगठित कर्मकारों, गिग (जीआईजी) वर्करों तथा प्लेटफार्म वर्करों के लिये सामाजिक सुरक्षा का भी प्रावाधान किया गया है। गिग वर्कर ओला, उबेर, स्वीगी, जोमेटो, बिलिंकइट व अमेजन जैसे मोबाइल ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी सेवाएं देने वाले कैब ड्राइवर, फूड डिलीवरी बॉय, कूरियर बॉय, फ्रीलांस लेखक, ग्राफिक डिजाइनर आदि होते हैं।

कैरियर सेंटर बनेगा :

नये नियमों में कैरियर सेंटर के गठन का भी प्रावधान किया गया है तथा राज्य में स्थित सभी निजी एवं शासकीय  सार्वजनिक क्षेत्र की प्रत्येक स्थापना में नियोक्ता, उस स्थापना में किसी नियोजन में किसी रिक्ति को भरने के पूर्व कैरियर सेंटर को रिपोर्ट करेगा।